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जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय – Jai Shankar Prasad Biography in Hindi

आज हम आपको जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय – Jai Shankar Prasad Biography in Hindi के बारे में बताने जा रहे हैं. कृपया पूर्ण जानकारी के लिए इस ब्लॉग को अवश्य पढ़ें. और अन्य जानकारी के लिए नव जगत के साथ बने रहे.

महान कवि एवं लेखक जयशंकर प्रसाद जी का जन्म उत्तर प्रदेश के काशी शहर में 1980 ईस्वी में हुआ था, उनके पिता का नाम श्री देवी प्रसाद एवं माता का नाम मुन्नी देवी था, बचपन में ही उनके पिता और माता का देहांत हो गया था, उसके बाद जयशंकर प्रसाद ने आठवीं तक अपनी औपचारिक शिक्षा प्राप्त की, और फिर स्वाध्याय के माध्यम से संस्कृत, पाली, उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी एवं साहित्य का विशेष ज्ञान प्राप्त किया, और फिर जयशंकर प्रसाद जी छायावाद के एक विशेष कवि बने, जयशंकर प्रसाद जी एक कथाकार नाटककार कवि कार एवं उपन्यासकार भी थे, जयशंकर प्रसाद जी के द्वारा ही हिंदी बोली का माधुर्य विकास हुआ, जो आज भी हिंदी भाषा के रूप में प्रचलित है. जयशंकर प्रसाद जी आनंदवाद के कट्टर समर्थक थे, क्योंकि,  जयशंकर प्रसाद जी के पिता विद्या अनुरागी थे, जयशंकर प्रसाद जी की प्रारंभिक शिक्षा उनके घर से ही प्रारंभ हुई थी, और उसके बाद जयशंकर प्रसाद जी को क्वीन्स कॉलेज उनके पिता द्वारा पढ़ाई करने के लिए भेज दिया गया, अल्प आयु में ही प्रसाद जी ने अपनी मेहनत और लगन से फारसी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी की शिक्षा का बेहतर ज्ञान प्राप्त किया, और उसके पश्चात जयशंकर प्रसाद जी ने नाटक और उपन्यास के माध्यम से अपना हुनर दिखाया, जयशंकर प्रसाद जी अपने प्रतिभा के बहुत ही धनी व्यक्ति थे साथ ही उनकी रूचि नाटक में अत्यधिक थी.

जयशंकरप्रसाद जी का साहित्य परिचय (jaishankar prasad ji ka sahityik parichay)

जयशंकर प्रसाद जी की बचपन से ही रुचि हिंदी साहित्य में थी, जब जयशंकर प्रसाद की उम्र मात्र 9 साल थी, तब वह अपने गुरु को – रसमय संयुक्त लेख लिख कर दिए थे, जिसका नाम कलाधर था. तब यह चाहते थे कि जयशंकर प्रसाद जी अपने पैतृक व्यवसाय  का देखभाल करें. परंतु उनके काव्य रचना के प्रेम और रुचि को देखते हुए, जयशंकर प्रसाद के गुरु भी जयशंकर प्रसाद जी को काव्य रचना के लिए छूट दे दी, अपने गुरु की सहमति और आशीर्वाद पाकर प्रसाद जी ने काव्य रचना एवं साहित्य लेखन में बड़े प्रेम और लगन के साथ लिखने लगे.

जयशंकर प्रसाद की रचनाएं (jaishankar prasad ki rachnaye)

जयशंकर प्रसाद जी का जीवन बचपन से ही रचनाओं से भरा हुआ था, प्रसाद जी की रचनाएं भारत के गौरवमई, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक कामयाबी का उनका सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय महाकवि में से एक है, आनंद वाद नई प्रतिष्ठा संकल्पना का संदेश चिन्हित है. रचनाएं नीचे निम्न रूप में दी गई है.

जयशंकर प्रसाद जी कि रचनाएं नीचे निम्न रूप में दी गई है. झरना, लहर, कामायनी, प्रेम पथिक (काव्य), स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, अजातशत्रु, आँधी, इंद्रजाल(कहानी संग्रह)  कंकाल, तितली, इरावती, (उपन्यास), करुणालय, कल्याणी, परिणय, पुवस्वामिनी, जन्मेजय का नागयज्ञ राज्यश्री, एक घूँट, करुणालय, कल्याणी परिणय, अग्निमित्र, प्रायश्चित, सज्जन (नाटक), छाया आदि.

जयशंकर प्रसाद की कहानियां (jaishankar prasad ji ki kahaniyan)

जयशंकर प्रसाद का जीवन कहानियों से भरा हुआ है, और उनकी कुछ कहानियों के नाम नीचे निम्न रूप में दिए गए हैं:- जहांआरा, मधुआ, उर्वशी, इंद्रजाल, गुलाम, ग्राम, भीख, चित्र, मंदिर, ब्रह्मर्षि, पुरस्कार, रमला, देवदासी, बिसाती, प्रणय-चिह्न, नीरा, शरणागत, चंदा, स्वर्ग, खंडहर, पंचायत, छोटा जादूगर, बभ्रुवाहन, विराम चिन्ह, सालवती, अमिट, स्मृति, रसिया, बालम, सिकंदर की शपथ, आकाश आदि.

जयशंकर प्रसाद की भाषा एवं शैली (jaishankar prasad ki bhasha shaili)

शंकर प्रसाद जी की भाषा संस्कृत के तत्सम शब्दों की बहुलता है, भावमयता उनकी भाषा की प्रमुख विशेषता है. इनकी भाषा में मुहावरों, लोकोक्तियों तथा विदेशी शब्दों का प्रयोग ना के बराबर हुआ है. प्रसाद जी ने विचारात्मक, चित्रात्मक, भावात्मक, अनुसंधानात्मक तथा इतिवृत्तात्मक शैली का प्रयोग किया है.

जयशंकर प्रसाद की साहित्यिक विशेषताएं

बचपन से ही जयशंकर प्रसाद जी की रुचि साहित्य की ओर थी. परिणाम स्वरूप जयशंकर प्रसाद जी ने इन्दु’ नामक मासिक पत्रिका का सम्पादन किया. साहित्य जगत में इन्हें वहीं से पहचान मिली. प्रेम समर्पण कर्तव्य एवं बलिदान की भावना से ओतप्रोत उनकी कहानियों पाठक को अभिभूत कर देती है. वह हिंदी साहित्य को अपनी साधना समझते थे. महाकवि जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य में योगदान देने वाले सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों में से एक थे. जयशंकर प्रसाद जी ने हिंदी साहित्य में अपना बहुत योगदान दिया. उन्होंने अपनी कहानियों, नाटक तथा कविताओं के जरिए हिंदी साहित्य में अपना माधुर्य बिखेरा. राजनीतिक संघर्ष तथा संकट की स्थिति में राजपुरुष का व्यवहार उन्होंने बड़ी गहराई से समझा और लिखा. आधुनिक उपन्यास के क्षेत्र में जयशंकर प्रसाद जी ने यथार्थ और आदर्शवादी रचनाकारों का सूत्रपात किया.

जयशंकर प्रसाद जी के पुरस्कार (jaishankar prasad ji ke puraskar)

जयशंकर प्रसाद जी की सबसे प्रसिद्ध कविता कामायनी पर उनको मंगला प्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ था.

FAQ

जयशंकर प्रसाद कौन थे ? (jaishankar prasad kaun the)

जयशंकर प्रसाद एक छायावादी युग के लेखक थे, जिनका जन्म वैश्य परिवार में हुआ था.

जयशंकर प्रसाद का जन्म कब हुआ? (jaishankar prasad ka janm kab hua)

जयशंकर प्रसाद का जन्म सन 1889 ईस्वी में हुआ था.

जयशंकर प्रसाद के दादाजी का क्या नाम था? (jaishankar prasad ji ke dada ka naam kya tha)

जयशंकर प्रसाद जी के दादाजी का नाम शिवरतन साहू था.

जयशंकर प्रसाद की माता का क्या नाम था ? (jaishankar prasad ji ke mata ka naam kya tha)

जयशंकर प्रसाद की माता का नाम श्रीमती मुन्नी देवी था.

जयशंकर प्रसाद की सबसे प्रसिद्ध कृति क्या है? (jaishankar prasad ki sabse prasiddh kriti)

जयशंकर प्रसाद की सबसे प्रसिद्ध कृति कामायानी हैं.

जयशंकर प्रसाद की कविताएं कौन-कौन सी हैं? (jaishankar prasad ki kavitayen ke naam)

जयशंकर प्रसाद की प्रमुख कविताएं – हिमाद्रि तुंग श्रृंग से , अरुण यह मधुमय देश हमारा, भारत महिमा.

जयशंकर प्रसाद की प्रथम कविता कौन सी है? (jaishankar prasad ji ki pratham kavita kaun si hai)

जयशंकर प्रसाद की प्रथम रचना चित्रधार थी.

जयशंकर प्रसाद के नाटक कौन-कौन से हैं? (jaishankar prasad ke natak kaun kaun se hain)

जयशंकर प्रसाद के प्रमुख नाटक – कंकाल, तितली, इरावती है.

जयशंकर प्रसाद की लंबी कविता कौन सी है? (jaishankar prasad ki lambi kavita kaun si hai)

जयशंकर प्रसाद की लंबी कविता टकराता फिरता पवमान, तरुण तपस्वी-सा वह बैठा.

जयशंकर प्रसाद की पत्नी का नाम बताइए? (jaishankar prasad ki patni ka naam bataiye)

जयशंकर प्रसाद की पत्नी का नाम कमला देवी था.

जयशंकर प्रसाद जी का जीवन परिचय कैसे लिखें?

जयशंकर प्रसाद जी एक महान लेखक और कवि थे इनका जन्म सन 1889 ई. में हुआ और इनकी मृत्यु – सन् 1037 ई में हुई. बहुमुखी प्रतिभा के धनी माने जाने वाले जयशंकर प्रसाद का जन्म वाराणसी के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था. बचपन में ही पिता के निधन से पारिवारिक उत्तरदायित्व का बोझ इनके कधों पर आ गया.

जयशंकर प्रसाद जी के द्वारा रचित अधूरा उपन्यास कौन सा है?

जयशंकर प्रसाद जी द्वारा रचित अधूरा उपन्यास इरावती (उपन्यास) है, जिसका प्रकाशन उनकी मृत्यु के बाद 1940 ई. में हुआ. दो उपन्यासों में प्रसाद ने वर्तमान समाज को अंकित किया है, पर इरावती में वे पुन: अतीत की ओर लौट गये है.

जयशंकर प्रसाद जी को कामायनी के लिए कौन सा पुरस्कार प्राप्त हुआ था?

जयशंकर प्रसाद जी को अपनी कामायनी विधा के लिए पुरस्कार – जय शंकर प्रसाद क ‘ कामायनी’ पर मंगला प्रसाद पारित र्प्राप्त हुआ था.

जयशंकर प्रसाद कौन सी काव्य रचना से विश्व प्रसिद्ध हुए?

जयशंकर प्रसाद जी का वह काव्य रचना कामायनी है, कामायनी महाकाव्य कवि प्रसाद की अक्षय कीर्ति का स्तम्भ है. भाषा, शैली और विषय–तीनों ही की दृष्टि से यह विश्व–साहित्य का अद्वितीय ग्रन्थ है.

जयशंकर प्रसाद किसकी रचना है?

जयशंकर प्रसाद जी को कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास यथार्थ रचना जैसी विधाओं पर महारत हासिल था. जयशंकर प्रसाद जी की प्रमुख कृतियां कामायनी, आंसू, कानन-कुसुम, प्रेम पथिक, झरना और लहर आदि है. जयशंकर प्रसाद के पिता वाराणसी के अत्यन्त प्रतिष्ठित नागरिक थे, और एक विशेष प्रकार की सुरती (तंबाकू) बनाने के कारण ‘सुंघनी साहु’ के नाम से जाना जाता था.

जयशंकर प्रसाद के ज्येष्ठ भ्राता का क्या नाम था?

उनके ज्येष्ठ भ्राता का नाम शम्भू रत्न था.

गुंडा किसकी रचना है?

गुंडा जयशंकर प्रसाद जी की रचना है.

झरना के रचनाकार कौन हैं?

झरना जयशंकर प्रसाद जी की रचना है.

जयशंकर प्रसाद का पहला नाटक कौन सा है?

जयशंकर प्रसाद का पहला नाटक राजश्री था.

जयशंकर प्रसाद का अंतिम नाटक कौन सा है?

जयशंकर प्रसाद का अंतिम नाटक ‘कामायनी’ था.

जयशंकर प्रसाद की कौन सी रचना हिंदी का मेघदूत कहलाती है?

जयशंकर प्रसाद जी की ‘आँसू’ नाम की हिंदी रचना को ‘हिन्दी का मेघदूत’ कहा जाता है. इसी कविता के माध्यम से जयशंकर प्रसाद जी को ‘प्रेम और सौंदर्य का कवि’ कहा जाता है.

आंसू कविता का प्रकाशन कब हुआ था?

आंसू कविता का प्रकाशन वर्ष 1925 में हुआ था.

आंसू कवित्य से आप क्या समझते हैं?

जब कोई कभी किसी विशेष अवसर के अनुसार उसी समय कविता बनाकर सुनाएं उसे आशुकवि कहते हैं.

कवि जयशंकर प्रसाद आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहते थे?

कवि जयशंकर प्रसाद आत्मकथा लिखने से बचना चाहते थे, क्योंकि उनका ऐसा मानना था, कि उनका जीवन अत्यंत ही साधारण है. उसमें कुछ भी ऐसा नहीं है, जिसे कि लोगों को पढ़कर किसी भी प्रकार की प्रसन्नता प्राप्त हो सके, उनका जीवन अत्यंत ही कठिनाइयों से भरा हुआ था, जिसके कारण वह अपने आत्मकथा को औरों को नहीं बताना चाहते थे.

जयशंकर प्रसाद की मृत्यु कब हुई?

जयशंकर प्रसाद की मृत्यु 15 नवंबर 1937 को हुई थी.

आशा करते हैं कि यह ब्लॉग आपको Jai Shankar Prasad Biography in Hindi – जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय की पूर्ण जानकारी प्रदान करने में समर्थ रहा. अन्य महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी के लिए हमारे अन्य ब्लॉग को अवश्य पढ़ें.

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