मधुमेह एक दशक पहले तक उम्र बढ़ने की बीमारी के रूप में जाना जाता था, हालांकि पिछले कुछ सालों में यह 40 साल से कम उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ता देखा गया है. कम उम्र में मधुमेह होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें जीवनशैली और खान-पान में गड़बड़ी, मोटापा और आनुवंशिकता प्रमुख हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह बच्चों में भी हो सकता है इतना ही नहीं जन्म के कुछ साल बाद भी बच्चे में मधुमेह का पता लगाया जा सकता है. बच्चों में मधुमेह की समस्या को काफी गंभीर और चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जो उनके जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है. विश्व स्तर पर मधुमेह के बढ़ते खतरे के बारे में लोगों को सचेत करने और इसे रोकने के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है. डॉक्टरों का कहना है, 5 साल से कम उम्र के बच्चों में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज दोनों का खतरा देखा गया है. ऐसे में इसे सिर्फ उम्र के साथ होने वाली बीमारी मानने की गलती नहीं करनी चाहिए.
डॉक्टरों का कहना है, बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज का खतरा सबसे ज्यादा होता है, जिसमें शरीर इंसुलिन हार्मोन नहीं बना पाता है, हालांकि जीवनशैली के कई कारकों ने भी बच्चों में टाइप-2 के खतरे को बढ़ा दिया है. आइए जानते हैं कि कम उम्र में ही यह बीमारी क्यों हो जाती है और किन लक्षणों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
बच्चों में टाइप 1 मधुमेह होने के ज्यादा chances
बच्चों में टाइप 1 मधुमेह, एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का शरीर हार्मोन इंसुलिन का उत्पादन करने में असमर्थ होता है. इस हार्मोन की जरूरत बच्चे के जीवित रहने से लेकर शरीर के अंगों के सही तरीके से काम करने तक होती है. शरीर में इसके उत्पादन के अभाव में ऐसे रोगियों को जीवन भर इंसुलिन के इंजेक्शन लगाते रहना पड़ता है. बच्चों में टाइप 1 मधुमेह का कोई इलाज नहीं है, इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है. इसके लक्षणों पर सभी माता-पिता को ध्यान देना जरूरी है.
बच्चों में टाइप 2 मधुमेह
बच्चों में टाइप 2 मधुमेह एक पुरानी समस्या है जो ऊर्जा के लिए ग्लूकोज को ठीक से संसाधित करने के तरीके को प्रभावित करती है. शारीरिक निष्क्रियता, खान-पान और मोटापे से ग्रस्त बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है. बच्चे में इस प्रकार के मधुमेह का खतरा बहुत तेजी से बढ़ता देखा गया है. बच्चे को स्वस्थ भोजन खाने, व्यायाम करने और स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करके इस जोखिम को कम किया जा सकता है. टाइप 1 मधुमेह के समान, प्यास का बढ़ना और बार-बार पेशाब आना, थकान, धुंधली दृष्टि, त्वचा पर काले धब्बे, बार-बार संक्रमण और घावों का ठीक से न भरना इस प्रकार के मधुमेह का संकेत हो सकता है.
मधुमेह से बचाव के लिए क्या करें?
टाइप 1 मधुमेह को रोका नहीं जा सकता, इसे केवल प्रबंधित किया जाता है. हालांकि, स्वस्थ जीवन शैली के विकल्प निश्चित रूप से बच्चों में टाइप 2 मधुमेह को रोकने में मदद कर सकते हैं. बच्चे को लो फैट और लो कैलोरी फूड दें. फलों, सब्जियों और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएँ. बच्चे को सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करें, खेलकूद और व्यायाम बच्चों के लिए बहुत जरूरी हैं. यदि मधुमेह का पारिवारिक इतिहास है, तो इन सावधानियों को गंभीरता से लेना आवश्यक हो जाता है.