शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देते हैं. शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है. शनिवार के दिन विधि-विधान से शनि देव की पूजा करने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. एक ओर जहां शनि देव के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं, दूसरी ओर शनि के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है. ऐसा माना जाता है कि शनि रंक को राजा भी बना सकते हैं.
करें इस कन्फ्यूजन को दूर
मान्यता के अनुसार श्री हनुमान रुद्र अवतार हैं और शनि देव ही रुद्र नाम है. इसलिए दोनों देवताओं में समानता होने के कारण इस दिन दोनों की पूजा की जाती है.
शनिवार को दोनों देवताओं की पूजा करना हिंदू धर्म के तहत सही है. दरअसल, सूर्य संहिता के अनुसार शनिवार के दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था.0इसलिए इस दिन इनकी पूजा करना भी गलत नहीं है.
सूर्य शनि का पिता है. और मान्यता के अनुसार सूर्य हनुमान के गुरु हैं. सभी मानते हैं कि शनि देव का अपने पिता से अनबन हो गई थी, लेकिन सूर्य ने हनुमान को उनके तेज का एक हिस्सा दिया था. इसके अलावा, दोनों को सूर्य का हिस्सा माना जा सकता है.
हनुमान सहस्रनाम देखा जाए तो शनि को हिंदू देवता हनुमान का नाम भी दिया गया है. इसलिए इस दिन दोनों की पूजा वैध मानी जाती है.
शनिदेव की आंखों में ना देखें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि शनि देव की पूजा करते समय शनिदेव की आंखों में नहीं देखना चाहिए, क्योंकि शनिदेव की पूजा करते समय यदि आप शनिदेव से नजर मिलाते हैं तो शनिदेव की बुरी नजर आप पर पड़ सकती है.
एकदम सामने ना खड़े हो
शनिदेव की पूजा आराधना करते समय उनकी प्रतिमा के सामने नहीं खड़े होना चाहिए क्योंकि शनिदेव के सामने खड़े होकर पूजा करने से अशुभ फल मिलता है.
शनिदेव की पूजा की विधि
शनिदेव की पूजा करने के लिए प्रातः काल उठकर स्नान कर लेना चाहिए, और उसके पश्चात मंदिर में दीपक प्रज्वलित करके व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए.
इसके बाद भगवान शनिदेव के मंदिर में जाकर शनिदेव को तिल का तेल और काली तिल अर्पित करना चाहिए.
इसके बाद भगवान शनि को भोग लगाना चाहिए.
और शनि देव की आरती करनी चाहिए, शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए, साथ ही शनि मंत्रों का जाप करना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि यह सब करने से शनि भगवान की कृपा बनी रहती है, और बुरी नजर नहीं लगती.