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शब्द किसे कहते हैं, परिभाषा और उदाहरण सहित

दो या दो से अधिक वर्णों को मिलकर जो परस्पर समूह बनता है, उस समूह को शब्द कहते हैं. किसी भी शब्द का कुछ ना कुछ अर्थ जरूर होता है.

किसी भी भाषा के सभी शब्दों की उत्पत्ति दो या दो से अधिक वर्णों के मेल मिलने से होती है, परंतु यह उस भाषा के वर्ण समूह पर निर्भर करता है, कि वह कितने वर्षों से मिलकर शब्द बनाती है.

लेकिन लगभग हर भाषा में दो या दो से अधिक वर्ण मिलकर ही एक ही शब्द का निर्माण करते हैं, जैसे नर मे दो वर्ण का मेल है एक न और दूसरा र का व्याकरण में निरर्थक शब्दों के लिए किसी भी प्रकार का स्थान नहीं होता है.

शब्द के भेद 

प्रयोग, उत्पत्ति और अर्थ के अनुसार शब्द के कई भेद हैं, जिनका वर्णन निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है, 

1) अर्थ की दृष्टि से शब्द-भेद

(i) साथर्क शब्द

(ii) निरर्थक शब्द 

(i) साथर्क शब्द –

जैसे कि इसके शब्द में पता चलता है, ऐसे शब्द जिनका प्रयोग किसी बात का अर्थ स्पष्ट हो वह सार्थक शब्द कल आते हैं, जैसे कि पलंग, संदूक, बोतल, किताब, ठंडा ब्लैक बोर्ड,  मोबाइल इत्यादि

(ii) निरर्थक शब्द –

जब दो या दो से अधिक वर्ण मिलकर एक शब्द बनाते हैं लेकिन उसका अर्थ नहीं बनता तो उस शब्द को  निरर्थक शब्द का नाम दिया जाता है, जैसे – सोलोइय, युफ्सियत, ओसभ, कोकी आदि, सार्थक शब्दों के अर्थ होते हैं, जबकि निरर्थक शब्दों का कोई भी अर्थ नहीं होता. 

2) प्रयोग की दृष्टि से शब्द-भेद

दो या दो से अधिक वर्ण मिलकर शब्द का निर्माण करते हैं और कई सारे शब्द मिलकर एक भाषा बनाते हैं शब्द को हम भाषा का प्राणवायु भी कह सकते हैं, क्योंकि बिना शब्दों के भाषा का कोई अस्तित्व नहीं होता है.

किसी भी भाषा में वाक्यों में शब्दों का प्रयोग किसी प्रकार से किया जाए इस साधारण शब्दों के दो भागों में बांट दिया जाता है.

(i) विकारी शब्द –

जाति के रूप में लिंग वचन और कार्य के आधार पर किसी प्रकार का परिवर्तन हो जाता है, तो वह शब्दों के विकारी शब्द कहते हैं.

विकास शब्द का अर्थ होता है परिवर्तन लिंग आदि के आधार पर शब्द में परिवर्तन होना

जैसे लिंग के आधार पर परिवर्तन – 

राम काम कर रहा है – सीता काम कर रही है. 

राम खाना खा रही है – सीता खाना खा रहा है.

राम पढ़ रहा है – सीता पढ़ रही है. 

राम बर्तन धो रही है – सीता बर्तन धो रहा है. 

उपयुक्त वाक्य में लिंग के आधार पर शब्द में परिवर्तन किया जाता है, जैसे कर रहा का कर रही हो जबकि लिंग के आधार पर परिवर्तन किया जाता है, तो शब्दों में कुछ ज्यादा अंतर नहीं पाया जाता है.

एकवचन और बहुवचन के आधार पर शब्दों में परिवर्तन –

बच्चा खेलता है – बच्चे खेलते हैं.

लड़की रोटी बनाती है – लड़कियां रोटी बनाती है.

औरत घर का काम करती है – औरतें घर का काम करती है.

उपयुक्त वाक्यों में देखा जा सकता है, कि किस प्रकार से एकवचन को बहुवचन में बदलने से शब्द का अर्थ बदल जा रहा है, ‘औरत’ शब्द सिर्फ एक औरत के लिए है, जबकि ‘औरतें’ शब्द बहुत सारी औरतों के लिए है इस प्रकार से बचन के आधार पर भी शब्दों में परिवर्तन हो जाता है

कारक के आधार पर शब्दों का परिवर्तन

वह लड़का नौकरी करता है – उस लड़के को नौकरी करने दो

वह बच्चा पड़ता है – उस बच्चे को पढ़ने दो

वह लड़का लिखता है – उस लड़के को लिखने दो

ऊपर लिखित वाक्यों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, कि किसी प्रकार के कारक के बदल जाने से शब्द का अर्थ बदल जाता है, किसी वाक्य में कारक का प्रयोग सिर्फ शब्द का अर्थ नहीं बदला अभी तो पूरे वाक्य का ही अर्थ बदल जाता है.

विकारी शब्द के चार प्रकार होते हैं:-

(i) संज्ञा (noun)

(ii) सर्वनाम (pronoun)

(iii) विशेषण (adjective)

(iv) क्रिया (verb)

अविकारी शब्द के चार प्रकार हैं:-

(i) क्रिया-विशेषण (Adverb)

(ii) सम्बन्ध बोधक (Preposition)

(iii) समुच्चय बोधक(Conjunction) 

(iv) विस्मयादि बोधक(Interjection)

3) उत्पति की दृष्टि से शब्द-भेद

(i) तत्सम शब्द 

(ii ) तद्भव शब्द 

(iii ) देशज शब्द एवं 

(iv) विदेशी शब्द

(i) तत्सम शब्द –

हिंदी भाषा संस्कृत भाषा का ही एक रूप होता है, और हिंदी भाषा में बहुत सारे ऐसे शब्द है, जो संस्कृत भाषा में लिए गए हैं, परंतु उनका अर्थ और प्रयोग संस्कृत भाषा के समान ही किया जाता है, इन शब्दों के तत्सम शब्द  को कहते हैं.

दूसरे शब्दों में कहें तो संस्कृत भाषा के वह शब्द जो हिंदी भाषा में लिए गए हैं, और वह अपने वास्तविक रूप में प्रयोग किए जाते हैं, वह तत्सम शब्द कहलाते हैं.

(ii ) तद्भव शब्द –

हिंदी भाषा के व्याकरण वह शब्द है जो संस्कृत भाषा के विकृत होकर हिंदी में आए हैं  वाह तद्भव शब्द कहते हैं, कहने का अर्थ है कि संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द जो सिर्फ थोड़े से ही बदलाव के साथ ही हिंदी भाषा में आ जाते हैं, वह तद्भव कहलाते हैं.

तद्धव शब्द दो प्रकार के है

(i)संस्कृत से आनेवाले 

(2)सीधे प्राकृत से आनेवाले

(iii ) देशज शब्द –

भारत देश में कई सारे स्थानों में भिन्न-भिन्न प्रकार के बोलियां बोली जाती है, और हिंदी भाषा में कई ऐसे शब्द है, जोकि कई बोलियों से लिए गए हैं, इन्हीं शब्दों में देशज शब्द का नाम दिया जाता है 

जैसे- चिड़िया, कटरा, कटोरा, खिरकी, जूता, खिचड़ी, पगड़ी, लोटा, डिबिया, तेंदुआ, कटरा, अण्टा, ठेठ, ठुमरी, खखरा, चसक, फुनगी, डोंगा आदि.

(iv) विदेशी शब्द –

विदेशी भाषाओं से जो शब्द हिंदी भाषा में जोड़े गए हैं, वह शब्द विदेशी शब्द कहलाते हैं, साधारण शब्दों में कहें तो शब्द विदेश के संपर्क में आने के बाद हिंदी भाषा में लिए गए हैं, वह शब्द विदेशी कहलाते हैं.

अंग्रेजी भाषा के शब्द  – हॉस्पिटल, डॉक्टर, रेडियो, पेन, पेंसिल, स्टेशन, कार, बुलेट, टिकट, टेलीफोन, कार, कंप्यूटर, ट्रेन, सर्कस, इत्यादि.

फारसी भाषा के शब्द – गिरफ्तार, नमक, दुकान, हफ्ता, जवान, दरोगा, आवारा, बहादुर, जहार, मुफ्त, जल्दी, खूबसूरत, बीमार, शादी, चश्मा, अफसोस, किनारा, इत्यादि.

अरबी भाषा के शब्द – तारीख, कीमत, अमीर, औरत, इज्जत, इलाज, वकील, किताब, कालीन, गरीब, जहाज, असर, मदद, इत्यादि.

तुर्की भाषा के शब्द – काबू, तलाश, चाकू, बेगम, बारूद, इत्यादि.

चीनी भाषा से लिए गए शब्द – चाय, पटाखा, आदि.

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लेकिन लगभग हर भाषा में दो या दो से अधिक वर्ण मिलकर ही एक ही शब्द का निर्माण करते हैं, जैसे नर मे दो वर्ण का मेल है एक न और दूसरा र का व्याकरण में निरर्थक शब्दों के लिए किसी भी प्रकार का स्थान नहीं होता है.

शब्द के भेद 

प्रयोग, उत्पत्ति और अर्थ के अनुसार शब्द के कई भेद हैं, जिनका वर्णन निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है, 

1) अर्थ की दृष्टि से शब्द-भेद

(i) साथर्क शब्द

(ii) निरर्थक शब्द 

(i) साथर्क शब्द –

जैसे कि इसके शब्द में पता चलता है, ऐसे शब्द जिनका प्रयोग किसी बात का अर्थ स्पष्ट हो वह सार्थक शब्द कल आते हैं, जैसे कि पलंग, संदूक, बोतल, किताब, ठंडा ब्लैक बोर्ड,  मोबाइल इत्यादि

(ii) निरर्थक शब्द –

जब दो या दो से अधिक वर्ण मिलकर एक शब्द बनाते हैं लेकिन उसका अर्थ नहीं बनता तो उस शब्द को  निरर्थक शब्द का नाम दिया जाता है, जैसे – सोलोइय, युफ्सियत, ओसभ, कोकी आदि, सार्थक शब्दों के अर्थ होते हैं, जबकि निरर्थक शब्दों का कोई भी अर्थ नहीं होता. 

2) प्रयोग की दृष्टि से शब्द-भेद

दो या दो से अधिक वर्ण मिलकर शब्द का निर्माण करते हैं और कई सारे शब्द मिलकर एक भाषा बनाते हैं शब्द को हम भाषा का प्राणवायु भी कह सकते हैं, क्योंकि बिना शब्दों के भाषा का कोई अस्तित्व नहीं होता है.

किसी भी भाषा में वाक्यों में शब्दों का प्रयोग किसी प्रकार से किया जाए इस साधारण शब्दों के दो भागों में बांट दिया जाता है.

(i) विकारी शब्द –

जाति के रूप में लिंग वचन और कार्य के आधार पर किसी प्रकार का परिवर्तन हो जाता है, तो वह शब्दों के विकारी शब्द कहते हैं.

विकास शब्द का अर्थ होता है परिवर्तन लिंग आदि के आधार पर शब्द में परिवर्तन होना

जैसे लिंग के आधार पर परिवर्तन – 

राम काम कर रहा है – सीता काम कर रही है. 

राम खाना खा रही है – सीता खाना खा रहा है.

राम पढ़ रहा है – सीता पढ़ रही है. 

राम बर्तन धो रही है – सीता बर्तन धो रहा है. 

उपयुक्त वाक्य में लिंग के आधार पर शब्द में परिवर्तन किया जाता है, जैसे कर रहा का कर रही हो जबकि लिंग के आधार पर परिवर्तन किया जाता है, तो शब्दों में कुछ ज्यादा अंतर नहीं पाया जाता है.

एकवचन और बहुवचन के आधार पर शब्दों में परिवर्तन -

बच्चा खेलता है – बच्चे खेलते हैं.

लड़की रोटी बनाती है – लड़कियां रोटी बनाती है.

औरत घर का काम करती है – औरतें घर का काम करती है.

उपयुक्त वाक्यों में देखा जा सकता है, कि किस प्रकार से एकवचन को बहुवचन में बदलने से शब्द का अर्थ बदल जा रहा है, ‘औरत’ शब्द सिर्फ एक औरत के लिए है, जबकि ‘औरतें’ शब्द बहुत सारी औरतों के लिए है इस प्रकार से बचन के आधार पर भी शब्दों में परिवर्तन हो जाता है

कारक के आधार पर शब्दों का परिवर्तन -

वह लड़का नौकरी करता है – उस लड़के को नौकरी करने दो

वह बच्चा पड़ता है – उस बच्चे को पढ़ने दो

वह लड़का लिखता है – उस लड़के को लिखने दो

ऊपर लिखित वाक्यों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, कि किसी प्रकार के कारक के बदल जाने से शब्द का अर्थ बदल जाता है, किसी वाक्य में कारक का प्रयोग सिर्फ शब्द का अर्थ नहीं बदला अभी तो पूरे वाक्य का ही अर्थ बदल जाता है.

https://navjagat.com/hindi-mein-kitne-swar-hote-hain/8671/

विकारी शब्द के चार प्रकार होते हैं:-

(i) संज्ञा (noun)

(ii) सर्वनाम (pronoun)

(iii) विशेषण (adjective)

(iv) क्रिया (verb)

अविकारी शब्द के चार प्रकार हैं:-

(i) क्रिया-विशेषण (Adverb)

(ii) सम्बन्ध बोधक (Preposition)

(iii) समुच्चय बोधक(Conjunction) 

(iv) विस्मयादि बोधक(Interjection)

3) उत्पति की दृष्टि से शब्द-भेद

(i) तत्सम शब्द 

(ii ) तद्भव शब्द 

(iii ) देशज शब्द एवं 

(iv) विदेशी शब्द

(i) तत्सम शब्द –

हिंदी भाषा संस्कृत भाषा का ही एक रूप होता है, और हिंदी भाषा में बहुत सारे ऐसे शब्द है, जो संस्कृत भाषा में लिए गए हैं, परंतु उनका अर्थ और प्रयोग संस्कृत भाषा के समान ही किया जाता है, इन शब्दों के तत्सम शब्द  को कहते हैं.

दूसरे शब्दों में कहें तो संस्कृत भाषा के वह शब्द जो हिंदी भाषा में लिए गए हैं, और वह अपने वास्तविक रूप में प्रयोग किए जाते हैं, वह तत्सम शब्द कहलाते हैं.

(ii ) तद्भव शब्द –

हिंदी भाषा के व्याकरण वह शब्द है जो संस्कृत भाषा के विकृत होकर हिंदी में आए हैं  वाह तद्भव शब्द कहते हैं, कहने का अर्थ है कि संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द जो सिर्फ थोड़े से ही बदलाव के साथ ही हिंदी भाषा में आ जाते हैं, वह तद्भव कहलाते हैं.

तद्धव शब्द दो प्रकार के है

(i)संस्कृत से आनेवाले 

(2)सीधे प्राकृत से आनेवाले

https://navjagat.com/chhota-u-ki-matra-wale-shabd/8668/

(iii ) देशज शब्द –

भारत देश में कई सारे स्थानों में भिन्न-भिन्न प्रकार के बोलियां बोली जाती है, और हिंदी भाषा में कई ऐसे शब्द है, जोकि कई बोलियों से लिए गए हैं, इन्हीं शब्दों में देशज शब्द का नाम दिया जाता है 

जैसे- चिड़िया, कटरा, कटोरा, खिरकी, जूता, खिचड़ी, पगड़ी, लोटा, डिबिया, तेंदुआ, कटरा, अण्टा, ठेठ, ठुमरी, खखरा, चसक, फुनगी, डोंगा आदि.

(iv) विदेशी शब्द –

विदेशी भाषाओं से जो शब्द हिंदी भाषा में जोड़े गए हैं, वह शब्द विदेशी शब्द कहलाते हैं, साधारण शब्दों में कहें तो शब्द विदेश के संपर्क में आने के बाद हिंदी भाषा में लिए गए हैं, वह शब्द विदेशी कहलाते हैं.

अंग्रेजी भाषा के शब्द  – हॉस्पिटल, डॉक्टर, रेडियो, पेन, पेंसिल, स्टेशन, कार, बुलेट, टिकट, टेलीफोन, कार, कंप्यूटर, ट्रेन, सर्कस, इत्यादि.

फारसी भाषा के शब्द – गिरफ्तार, नमक, दुकान, हफ्ता, जवान, दरोगा, आवारा, बहादुर, जहार, मुफ्त, जल्दी, खूबसूरत, बीमार, शादी, चश्मा, अफसोस, किनारा, इत्यादि.

अरबी भाषा के शब्द – तारीख, कीमत, अमीर, औरत, इज्जत, इलाज, वकील, किताब, कालीन, गरीब, जहाज, असर, मदद, इत्यादि.

तुर्की भाषा के शब्द – काबू, तलाश, चाकू, बेगम, बारूद, इत्यादि.

चीनी भाषा से लिए गए शब्द – चाय, पटाखा, आदि.