यदि आप सीहोर में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको सीहोर में मौजूद कुछ बेहतरीन पर्यटक स्थलों के बारे में जानकारी होनी आवश्यक होती है. तो आज के इस ब्लॉग में हम आपको सीहोर में मौजूद उन्हें बेहतरीन पर्यटक स्थलों के बारे में बताएंगे.
1. गणेश मंदिर सीहोर
गणेश मंदिर पश्चिम दिशा में गोपालपुर गांव में स्थित है, गणेश मंदिर जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर की दूरी पर है पौराणिक कथा के अनुसार, यह उज्जैन के विक्रमादित्य के समय का है, और मराठा पेशवा बाजीराव के द्वारा नवीनीकृत किया गया है, गणेश मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं, गणेश चतुर्थी त्यौहार भी यहां लोकप्रिय है.
2. कुंवर चैनसिंग की समाधी
कुंवर चैनसिंह समाधी सीहोर – इंदौर रोड पर लोटिया नदी के तट पर दशहरा वाला मैदान से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, ये समाधियां नरसिंहगढ़ स्टेट के देशभक्त युवराज चैनसिंह और ब्रिटिश पोलिटिकल मिस्टर मंशांक के बीच की ऐतिहासिक लड़ाई की याद दिलाते हैं, सन 1824 में सर्वप्रथम नरसिंह ग्रह के युवराज चैनसिंह द्वारा अंग्रेजो के विरुद्ध बगावत की, अंग्रेज सेना और क्रांतिकारियों के बीच सीहोर में युद्ध हुआ जिसमे कुंवर चैन सिंह बहादुरी से लड़ते हुए, अपने साथियो के साथ इसी स्थान पर शहीद हुए थे, तबसे शासन द्वारा प्रति वर्ष जुलाई माह में इनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित कर गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया जाता है.
3. ऑल सेंट्स चर्च
ऑल सेंट्स चर्च का निर्माण सन 1838 में ब्रिटिश पोलिटिकल एजेंट द्वारा बनाया गया था, जो स्कॉटलैंड से संबंधित था, यह इमारत स्कॉटलैंड के एक चर्च की सटीक प्रतिकृति है, सीहोर की यात्रा के लिए शरद ऋतु वर्ष का सबसे अच्छा समय माना जाता है.
4. विंध्यवासिनी माता मंदिर सलकनपुर
विंध्यवासिनी माता का मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है, बिजासन देवी का यह पवित्र सिद्ध पीठ (देवी दुर्गा) तहसील मुख्यालय के पास सलकनपुर गांव में एक 800 फुट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है यह भोपाल से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, प्रत्येक नवरात्रि को यहां मेला आयोजित किया जाता है मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल मार्ग, तथा सीढ़ियां मार्ग भी हैं, जिसमें 1000 से ज्यादा सीढ़ियां है इसका रखरखाव सलकनपुर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है.
5. सरु मरू की गुफाये
सरु मारु एक प्राचीन मठ परिसर और बौद्ध गुफाओं का पुरातात्विक स्थल है, यह सीहोर जिले के बुधनी तहसील के ग्राम पान गुराड़िया के पास स्थित है, यह सांची से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर है इस स्थल में कई स्तूप के साथ-साथ भिक्षुओं के लिए प्राकृतिक गुफाएं भी हैं यहां के आस – पास का दृश्य प्राकृतिक रूप से बहुत ही सुंदर है.

