मंगल चंडिका शक्ति पीठ को हिंदू धर्म में प्रसिद्ध दिन 51 शक्तिपीठों में से एक माना गया है यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल राज्य के बर्धमान जिले में गुस्कारा के उज्जैनी गांव में स्थित है, गुस्कारा रेलवे स्टेशन इस स्थान से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
किस प्रकार हुआ इस शक्तिपीठ का निर्माण
महादेव की पत्नी देवी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई, जब सब शिवजी को यह सब पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया, बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे, जिस स्थान पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे थे वह स्थान शक्तिपीठों में निर्मित हो गए, यदि पौराणिक कथाओं की मानें तो उनके अनुसार देवी देह के अंगों से इनकी उत्पत्ति हुई, जिसे भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें से 51 शक्तिपीठों का ज्यादा महत्व माना गया है.
उज्जयिनी- मांगल्य चंडिका
इस शक्तिपीठ को 3 स्थानों में बताया जाता है, पहला स्थान तो मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में रूद्र तलाव के पास हरि सिद्ध मंदिर को शक्तिपीठ माना गया है, तथा दूसरा पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले से 16 किमी गुस्कुर स्टेशन से उज्जयिनी नामक स्थान पर यह शक्तिपीठ के होने का दावा किया जाता है, वही कुछ उज्जैन के निकट शिप्रा नदी के तट पर स्थित भैरवपर्वत पर गड़गालिका, तीसरा स्थान गुजरात के गिरनार पर्वत के सन्निकट भैरवपर्वत को वास्तविक शक्तिपीठ को माना गया है, इन्हीं में से एक स्थान पर देवी सती के हाथ की कलाई गिरी थी, इसकी शक्ति है मंगल चंद्रिका और भैरव को कपिलांबर कहे जाते हैं.
महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन स्थित हरसिद्धि मंदिर को देवी का मुख्य शक्तिपीठ माना गया है, यहां पर देवी की शक्ति को ‘मंगल चण्डिका’ तथा शिव ‘मांगल्य कपिलांबर’ स्थित है, कहां जाता है कि यहां पर माता की कोहनी का निपात गिरा था, इसी कारण से तीन अलग-अलग शक्तिपीठ माने गए हैं.