देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक जयंती शक्तिपीठ जयंतिया परगना के भोरभोग गांव में काला जोर के खासी पर्वत पर स्थित है, कुछ लोगों का मानना है कि जयंती शक्तिपीठ मेघालय में स्थापित है, मेघालय में गारी खासी जयंतिया नामक मुख्य तीन पहाड़िया मानी गई है, इसी पहाड़ी पर जयंती शक्तिपीठ भी स्थापित है.
कैसे हुआ शक्तिपीठ का निर्माण
भगवान शिव की पत्नी देवी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पिता से अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई, जब यह सब भगवान शिव को पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया, इसके बाद में भगवान शंकर माता सती के मृत शरीर को अपने कंधे पर लेकर तांडव नृत्य करने लगे तो ब्रह्मांड को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के मृत शरीर को 51 भागों में काट दिया था, जिस स्थान पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे थे वह स्थान शक्तिपीठों में निर्मित हो गए, यदि पौराणिक कथाओं की मानें तो देवी देह के अंगों से शक्तिपीठ की उत्पत्ति हुई, जिसे भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिसमें से 51 शक्तिपीठों को ज्यादा महत्व दिया जाता है.
जयंती- जयंतीया
बांग्लादेश के सिल्हैट जिले में जयंतीया परगना के भोरभोग गांव कालाजोर के खासी पर्वत पर जयंती माता मंदिर स्थापित है यहां पर देवी सती का बायीं जंघा गिरी थी, इसकी शक्ति है जयंती और भैरव को क्रमदीश्वर माना गया है, तथा कुछ जगहों पर माना जाता है कि यह शक्तिपीठ मेघालय में स्थित है, मेघालय भारत का पूर्वी राज्य माना गया है जहां पर गारी, खासी और जयंतिया नामक मुख्य पहाड़ियां स्थित है, यह जयंतिया पहाड़ी पर ही ‘जयंती शक्तिपीठ’ है, यहां पर देवी सती के “वाम जंघ” का निपात हुआ था, यह शक्तिपीठ शिलांग से 53 किलोमीटर दूर जयंतीया पर्वत के बाउर भाग गांव में स्थापित है, यहाँ की सति ‘जयंती’ तथा शिव ‘क्रमदीश्वर’ हैं, शिलांग स्थान रेलमार्ग से नहीं जुड़ा है, और साथ ही निकटस्थ रेलवे स्टेशन गोलपारा टाउन है, या लुमडिंग है, इस स्थान से यात्री सड़क मार्ग से भी जा सकते हैं