त्योहारों या छुट्टियों के मौसम में ट्रेन का कन्फर्म टिकट मिलना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता। जब हम टिकट बुक करते हैं और वह वेटिंग में चला जाता है, तो टिकट पर RAC, GNWL, RLWL या PQWL जैसे कोड लिखे आते हैं।
ज्यादातर लोगों को लगता है कि वेटिंग लिस्ट सिर्फ एक ही तरह की होती है, लेकिन असल में भारतीय रेलवे कई अलग-अलग तरह की वेटिंग लिस्ट जारी करता है। आपका टिकट कन्फर्म होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको कौन सा ‘वेटिंग कोड’ मिला है। आइए जानते हैं रेलवे की सभी वेटिंग लिस्ट के प्रकार और उनके कन्फर्म होने के चांस:
1. RAC (Reservation Against Cancellation)

- यह क्या है: RAC का सीधा मतलब है कि आपकी यात्रा पक्की है और आपको ट्रेन में चढ़ने की अनुमति है। इसमें एक स्लीपर बर्थ (आमतौर पर साइड लोअर) को दो RAC यात्रियों के बीच बांट दिया जाता है, यानी आपको बैठकर यात्रा करने की जगह मिल जाती है।
- कन्फर्म होने के चांस: इसके फुल कन्फर्म (पूरी बर्थ मिलने) होने की संभावना सबसे अधिक होती है। चार्ट बनने पर या यात्रा के दौरान अगर कोई कन्फर्म यात्री नहीं आता है या अपना टिकट कैंसिल करता है, तो टीटीई (TTE) सबसे पहले RAC यात्री को ही वह पूरी बर्थ अलॉट करता है।
2. GNWL (General Waiting List)

- यह क्या है: यह सबसे सामान्य और सबसे ज्यादा जारी होने वाली वेटिंग लिस्ट है। जब कोई यात्री ट्रेन के शुरू होने वाले स्टेशन (Originating Station) या उसके आस-पास के स्टेशनों से यात्रा शुरू करता है, तब यह कोड दिया जाता है।
- कन्फर्म होने के चांस: RAC के बाद इस वेटिंग लिस्ट के कन्फर्म होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। जब कोई कन्फर्म टिकट वाला यात्री अपना टिकट कैंसिल करता है, तो सबसे पहले GNWL वालों को ही सीट दी जाती है।
3. RLWL (Remote Location Waiting List)

- यह क्या है: ट्रेन जिस स्टेशन से शुरू होती है और जहाँ खत्म होती है, उसके बीच में कई बड़े शहर या महत्वपूर्ण स्टेशन आते हैं। रेलवे इन बीच वाले बड़े स्टेशनों के लिए एक अलग कोटा रखता है। जब आप ऐसे किसी बीच के स्टेशन से टिकट बुक करते हैं, तो आपको RLWL मिलता है।
- कन्फर्म होने के चांस: इसके कन्फर्म होने की संभावना GNWL के मुकाबले काफी कम होती है। आपका टिकट तभी कन्फर्म होगा जब उस खास स्टेशन (Remote Location) से यात्रा करने वाला कोई कन्फर्म यात्री अपना टिकट कैंसिल करेगा।
4. PQWL (Pooled Quota Waiting List)

- यह क्या है: यह कोटा छोटे स्टेशनों के लिए होता है। अगर कोई यात्री ट्रेन के शुरू होने वाले स्टेशन से किसी बीच के छोटे स्टेशन तक, या दो बीच के स्टेशनों के बीच यात्रा कर रहा है, तो उसे PQWL में डाला जाता है। पूरी ट्रेन के लिए सिर्फ एक ही पूल्ड कोटा (Pooled Quota) होता है।
- कन्फर्म होने के चांस: इस लिस्ट के कन्फर्म होने की संभावना बहुत ही कम (ना के बराबर) होती है। जब तक कोई उसी कोटे का यात्री अपना टिकट रद्द नहीं करता, तब तक सीट नहीं मिलती।
5. TQWL (Tatkal Waiting List)

- यह क्या है: पहले इसे CKWL कहा जाता था। जब आप तत्काल कोटे के तहत टिकट बुक करते हैं और सीटें फुल हो जाती हैं, तो आपको TQWL दिया जाता है।
- कन्फर्म होने के चांस: इस लिस्ट में टिकट तभी कन्फर्म होता है जब कोई दूसरा तत्काल कन्फर्म टिकट वाला यात्री अपना टिकट कैंसिल करे (जो कि बहुत कम होता है क्योंकि तत्काल टिकट कैंसिल करने पर रिफंड नहीं मिलता)। ध्यान दें, TQWL टिकट कभी भी RAC में नहीं बदलता; यह या तो सीधा कन्फर्म होता है या फिर वेटिंग ही रहता है।
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6. RQWL (Request Waiting List)

- यह क्या है: यह वेटिंग लिस्ट तब बनती है जब कोई यात्री ऐसे दो बीच के स्टेशनों के बीच टिकट बुक करता है, जो जनरल (GNWL), रिमोट (RLWL) या पूल्ड (PQWL) कोटे में नहीं आते हैं।
- कन्फर्म होने के चांस: यह बहुत ही दुर्लभ वेटिंग लिस्ट है और इसके कन्फर्म होने के चांस भी बहुत कम होते हैं।
7. RSWL (Roadside Station Waiting List)

- यह क्या है: यह वेटिंग लिस्ट तब दी जाती है जब टिकट ट्रेन के शुरू होने वाले स्टेशन से रूट पर पड़ने वाले किसी महत्वपूर्ण ‘रोडसाइड स्टेशन’ के लिए बुक किया गया हो।
- कन्फर्म होने के चांस: इसमें भी टिकट के कन्फर्म होने की संभावना बहुत कम होती है।

