भारतीय रेलवे (Indian Railways) से हम सभी सफर करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी ट्रेन के डिब्बों (Coaches) के बाहर लिखे कोड्स पर ध्यान दिया है? जब हम टिकट बुक करते हैं, तो हमें S1, B2, A1 या HA1 जैसी सीटें अलॉट होती हैं।
ज्यादातर लोग सिर्फ अपना कोच नंबर ढूंढकर ट्रेन में चढ़ जाते हैं, लेकिन हर एक अक्षर (Code) का एक खास मतलब और सुविधा होती है। आइए आज ट्रेन के अलग-अलग कोच और उनकी खासियत समझते हैं।
1. जनरल कोच (General Coach – GS)

- क्या है खासियत: यह ट्रेन का सबसे सस्ता और बिना रिजर्वेशन वाला डिब्बा होता है। इसमें यात्रा करने के लिए आपको स्टेशन के काउंटर से जनरल टिकट लेना होता है। इसमें सीटों की कोई निश्चित संख्या नहीं होती, इसलिए जो पहले आता है, उसे सीट मिल जाती है।
- कहाँ होता है: आमतौर पर ट्रेन के सबसे आगे और सबसे पीछे जनरल डिब्बे लगाए जाते हैं।
2. स्लीपर कोच (Sleeper Coach – S)

- क्या है खासियत: यह नॉन-AC स्लीपर कोच होता है, जिसे S1, S2, S3 आदि से दर्शाया जाता है। भारत में सबसे ज्यादा यात्री इसी क्लास में सफर करते हैं। इसमें एक केबिन में 8 सीटें (Lower, Middle, Upper, Side Lower, Side Upper) होती हैं।
- सुविधा: इसमें खिड़कियां खुलती हैं और पंखे लगे होते हैं। बजट में लंबी यात्रा के लिए यह सबसे बेहतरीन विकल्प है।
3. थर्ड एसी कोच (3AC Coach – B)

- क्या है खासियत: इसे B1, B2, B3 आदि कोड से पहचाना जाता है। यह पूरी तरह से वातानुकूलित (Air Conditioned) डिब्बा है। इसका सीटिंग अरेंजमेंट स्लीपर (S) कोच जैसा ही होता है, लेकिन इसमें शीशे वाली बंद खिड़कियां होती हैं।
- सुविधा: इसमें यात्रियों को रेलवे की तरफ से बेडरोल (चादर, तकिया, कंबल) दिया जाता है।
4. सेकंड एसी कोच (2AC Coach – A)

- क्या है खासियत: इसका कोड A1, A2 आदि होता है। थर्ड एसी के मुकाबले इसमें काफी ज्यादा जगह (Legroom) मिलती है।
- सुविधा: इसमें मिडिल बर्थ (Middle Berth) नहीं होती। एक केबिन में सिर्फ 6 सीटें होती हैं। प्राइवेसी के लिए हर बर्थ पर पर्दे (Curtains) लगे होते हैं और हर यात्री के लिए अलग से रीडिंग लैंप होता है।
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5. फर्स्ट एसी कोच (1AC Coach – H)

- क्या है खासियत: इसे H1 के नाम से जाना जाता है। यह रेलवे का सबसे महंगा और प्रीमियम कोच है, जिसका किराया अक्सर फ्लाइट के बराबर होता है।
- सुविधा: इसमें कोई साइड बर्थ नहीं होती। इसमें 4 सीटों वाले केबिन (Cabin) और 2 सीटों वाले कूप (Coupe) होते हैं, जिन्हें यात्री अंदर से लॉक कर सकते हैं। इसमें बेहतरीन खाना, पर्सनल अटेंडेंट और शानदार बेडरोल मिलता है।
6. एसी चेयर कार (AC Chair Car – CC)

- क्या है खासियत: यह सिर्फ बैठने वाली (Seating) AC क्लास है, जिसमें स्लीपर बर्थ नहीं होती। शताब्दी (Shatabdi) या वंदे भारत (Vande Bharat) जैसी दिन में चलने वाली ट्रेनों में मुख्य रूप से CC कोच होते हैं।
- सुविधा: इसमें 3×2 या 2×2 के फॉर्मेट में गद्देदार कुर्सियां होती हैं जो पीछे की तरफ झुक (Recline) सकती हैं।
7. सेकंड सीटिंग / नॉन-एसी चेयर कार (Second Seating – D)

- क्या है खासियत: इसे D1, D2 कोड से दर्शाया जाता है। जनशताब्दी (Jan Shatabdi) या इंटरसिटी (Intercity) ट्रेनों में यह कोच पाया जाता है।
- सुविधा: यह रिजर्वेशन वाला नॉन-AC कोच है। इसमें CC कोच जैसी ही कुर्सियां होती हैं, लेकिन यह AC नहीं होता।
8. हाफ एसी कोच (HA Coach)

- क्या है खासियत: इसे HA1 कहा जाता है। जब किसी रूट पर फर्स्ट AC और सेकंड AC के यात्रियों की संख्या कम होती है, तो रेलवे एक ही डिब्बे में दोनों क्लास की सुविधा देता है।
- सुविधा: इस डिब्बे का आधा हिस्सा फर्स्ट AC (H) का होता है और आधा हिस्सा सेकंड AC (A) का होता है।
9. पावर कार / जेनरेटर कार (Generator Car – EOG)

- क्या है खासियत: EOG (End on Generation) कोच LHB (लाल रंग वाले) ट्रेनों के दोनों सिरों (आगे और पीछे) पर लगे होते हैं।
- सुविधा: इनमें बड़े जेनरेटर रखे होते हैं, जो पूरी ट्रेन के डिब्बों में लाइट, पंखे, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और AC चलाने के लिए बिजली सप्लाई करते हैं। इसके आधे हिस्से में गार्ड (Guard) का केबिन और सामान रखने की जगह (Luggage Van) होती है।

