यह शक्तिपीठ देवी की 51 शक्तिपीठों में से एक गायत्री शक्तिपीठ राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर से 5 किलोमीटर की दूरी पर एक पहाड़ी पर स्थित है, इस शक्तिपीठ को मणिदेविक मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है.
कैसे हुआ शक्तिपीठ का निर्माण
भगवान शिव की पत्नी देवी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पिता से अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई, जब यह सब भगवान शिव को पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया, इसके बाद में भगवान शंकर माता सती के मृत शरीर को अपने कंधे पर लेकर तांडव नृत्य करने लगे तो ब्रह्मांड को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के मृत शरीर को 51 भागों में काट दिया था, जिस स्थान पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे थे वह स्थान शक्तिपीठों में निर्मित हो गए, यदि पौराणिक कथाओं की मानें तो देवी देह के अंगों से शक्तिपीठ की उत्पत्ति हुई, जिसे भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिसमें से 51 शक्तिपीठों को ज्यादा महत्व दिया जाता है.
मणिबन्ध मणिदेविक गायत्री शक्तिपीठ
अजमेर के पास विश्व प्रसिद्ध पुष्कर नामक स्थान से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर गायत्री पर्वत मेंदेवी सती की कलाई गिरी थी,इसी कारण से यह स्थान मणिबंध नाम से प्रसिद्ध है, इसे मणिदेविक मंदिर भी कहते हैं, इसकी शक्ति माने गए हैं, गायत्री और शिव को सर्वानंद हैं, यह शक्तिपीठ मणि देवी का शक्तिपीठ और गायत्री मंदिर के नाम से ज्यादा विख्यात है.
मणिदेविक गायत्री शक्तिपीठ पुष्कर कैसे पहुंचे
यदि आप रेल मार्ग से यात्रा करना चाहते हैं तो रेलवे स्टेशन अजमेर जंक्शन है, यह मुंबई अहमदाबाद और जयपुर दिल्ली रेल लाइनों के बीच स्थित है, यदि आप हवाई मार्ग से यात्रा करना चाहते हैं तो निकटतम हवाई अड्डा जयपुर में सांगानेर हवाई अड्डा है,जो कि अजमेर शहर से 135 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

