चट्टल भवानी शक्तिपीठ बांग्लादेश में चिट्टागौंग (चटगाँव) जिला के सीताकुंड स्टेशन के पास चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल चट्टल या में स्थापित है, यहाँ पर माता सती की दायीं भुजा गिरी थी, इस स्थान तक पहुंचने के लिए आपको रेलगाड़ी और बस उपलब्ध है.
किस प्रकार हुआ इस शक्तिपीठ का निर्माण
महादेव की पत्नी देवी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई, जब सब शिवजी को यह सब पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया, बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे, जिस स्थान पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे थे वह स्थान शक्तिपीठों में निर्मित हो गए, यदि पौराणिक कथाओं की मानें तो उनके अनुसार देवी देह के अंगों से इनकी उत्पत्ति हुई, जिसे भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें से 51 शक्तिपीठों का ज्यादा महत्व माना गया है.
चट्टल- भवानी
चट्टल शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक माना गया है, बांग्लादेश में चिट्टागौंग (चटगांव) जिला से 38 किलोमीटर दूर सीताकुंड स्टेशन के निकट समुद्रतल से 350 मीटर की ऊंचाई पर चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल में माता की दायीं भुजा का हिस्सा गिरा था, इसकी शक्ति भवानी है और भैरव को चंद्रशेखर कहे जाते हैं, यह चंद्रशेखर देव का भी मंदिर माना गया है, यहीं पर पास में ही सीताकुण्ड, व्यासकुण्ड, सूर्यकुण्ड, ब्रह्मकुण्ड, बाड़व कुण्ड, लवणाक्ष तीर्थ, सहस्त्रधारा, जनकोटि शिव भी हैं, बाडव कुण्ड से हमेशा आग निकलती रहती है.