बंगाल के सालबाढ़ी गांव में स्थित त्रिस्रोत स्थान पर देवी सती का बाया पैर गिरा था, यहां की शक्ति भ्रामरी तथा भैरव अम्बर माने गए हैं, भ्रामरी को मधुमक्खियों की देवी के रूप में भी प्रसिद्ध है, देवी महात्म्य में इनका उल्लेख मिलता है, देवी भागवत पुराण में संपूर्ण जीवन के लिए उसकी महानता बताई गई है, और इसमें उनकी सर्वोच्च शक्तियों का वर्णन मिलता है.
किस प्रकार हुआ इस शक्तिपीठ का निर्माण
महादेव की पत्नी देवी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई, जब सब शिवजी को यह सब पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया, बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे, जिस स्थान पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे थे वह स्थान शक्तिपीठों में निर्मित हो गए, यदि पौराणिक कथाओं की मानें तो उनके अनुसार देवी देह के अंगों से इनकी उत्पत्ति हुई, जिसे भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें से 51 शक्तिपीठों का ज्यादा महत्व माना गया है.
त्रिस्रोता- भ्रामरी शक्तिपीठ
भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी के बोडा मंडल के सालबाढ़ी ग्राम स्थित त्रिस्रोत स्थान पर देवी सती का बाया पैर गिरा था, इसकी शक्ति मानी जाती है भ्रामरी और शिव को अंबर और भैरवेश्वर हैं, भ्रामरी को मधुमक्खियों की देवी के रूप में भी प्रसिद्ध है, देवी महात्म्य में उनका उल्लेख मिलता है, देवी भागवत पुराण में संपूर्ण ब्रह्मांड के जीवों के लिए उसकी महानता दिखाई गई और उनकी सर्वोच्च शक्तियों के बारे में वर्णन मिलता है.