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भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था?

आज हम आपको भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था?(sone ki chidiya) के बारे में बताने जा रहे हैं। कृपया पूर्ण जानकारी के लिए इस ब्लॉग को अवश्य पढ़ें और अन्य जानकारी के लिए नव जगत के साथ बने रहे.

जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि आज से लगभग 400 वर्ष पहले भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. क्योंकि  हमारे भारत देश में सोना पर्याप्त मात्रा में पाया जाता था. यही कारण था, कि यह विश्व के अमीर देशों की सूची में आता था. और इसी के चलते हर कोई भारत देश पर शासन करने का स्वप्न देखता था.  इसलिए भारत पर अपना अधिपत्य स्थापित करने के लिए यहां कई देशों द्वारा आक्रमण किए गए.  जिनमें से कुछ देशों द्वारा यहां लंबे समय तक राज भी किया गया.

वही हमारे देश में अंग्रेजों ने बहुत समय तक अपनी हुकूमत बरकरार रखी. और इसी के चलते भारत में कई तरह की हानिया भी हुई. और यही कारण है. कि जहां पहले भारत को सोने का चिड़िया होने का दर्जा मिलता था, अब वह दर्जा पूरी तरीके से खत्म हो चुका है. क्योंकि जितने भी देशों ने यहां आक्रमण करके जीत प्राप्त की और अपना आधिपत्य स्थापित किया, वह यहां से जाते समय जिन-जिन राज्यों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया था. उन सभी राज्यों को पूरी तरीके से लूट लिया, वहां की सारी धनसंपदा और खजाने सब अपने साथ ले गए. और यही कारण था, कि भारत को सोने की चिड़िया कहने का दर्जा खत्म हो गया.

भारत का सोने की चिड़िया कहे जाने के कारण

भारत को सोने की चिड़िया कहे जाने के पीछे कई बड़े कारण है. क्योंकि उस समय भारत के राजाओं के पास पर्याप्त धन और संपत्ति थी. वही उस समय पर भारत एक आत्मनिर्भर देश था. क्योंकि यहां कई ऐसी चीजों का उत्पादन होता था. जो विदेशों में भी विक्रय की जाती थी. जैसे कि मसाले, कपास आदि जो विदेशों में भी बेचे जाते थे. और इन्हीं चीजों को अन्य देशों में भारत द्वारा खरीदा जाता था. और इसके अलावा उस समय भारत में सकल घरेलू उत्पाद भी बहुत अच्छा हुआ करता था. और भी ऐसे बहुत कारण हैं, जिनके कारण भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. कारण नीचे बताए गए हैं. जो इस प्रकार है :-

मयूर सिंहासन :-

मयूर सिंहासन सबसे बड़ा कारण था, कि भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. क्योंकि इस सिंहासन की प्रतिष्ठा अलग ही हुआ करती थी. ऐसा कहा जाता है, कि इस सिंहासन के निर्माण में जितना धन लगा है इतने धन में दो ताजमहल का निर्माण किया जा सकता है. लेकिन सन 1739 में एक फारसी शासक नादिर शाह ने इस राज्य पर युद्ध करके इस सिंहासन को जीत कर अपने साथ ले गया. और यह सिंहासन क्यों इतना प्रख्यात था. और किसका था, यह सिंहासन इसके बारे में हम आपको नीचे बताएंगे.

मयूर सिंहासन का इतिहास :-

मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहा के द्वारा 17 वी शताब्दी में शुरू किया गया था. इस सिंहासन के निर्माण में शाहजहां ने अपना आधा शाही खजाना खर्च कर दिया था. इस सिंहासन के निर्माण के लिए लगभग 1000 किलो सोने का प्रयोग किया गया था. और इतना ही नहीं बल्कि इस सिंहासन को और सुंदर बनाने के लिए इसमें कई बेश कीमती हीरे और पत्थरों को भी इसमें लगाया गया था. और इन पत्थरों के अतिरिक्त सिंहासन की शान बढ़ाने के लिए इसमें विश्व का सबसे बेश कीमती हीरा कोहिनूर हीरा भी लगाया गया था. और इसके अलावा अगर इस सिंहासन को बनाने में लगने वाले धन की बात करें तो इसमें 4.5 अरब लगाए गए थे, जो कि वर्तमान में भारत रुपए के अनुसार 450 करोड़ है.

सकल घरेलू उत्पाद :-

जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि आज से लगभग 1 ईशा पूर्व पहले भारत में दुनिया का सबसे ज्यादा सकल घरेलू उत्पाद हुआ करता था. और सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद ही नहीं बल्कि भारत में कई बेश कीमती पत्थर में पाए जाते थे. और इसके अलावा भारत में पर्याप्त मात्रा में सोना भी पाया जाता था. लेकिन भारत में हुए कई बार हमले और शासन के वजह से इन सभी चीजों में गिरावट आई. और यही कारण है. कि अब भारत सोने की चिड़िया के नाम से नहीं जाना जाता है.

भारत के राजाओं की मेहनत :-

प्राचीन समय में भारत के सभी राजाओं ने अपने शासनकाल में अपने राज्य को और विकसित करने के लिए उसमें कई कार्य करवाए थे. जिसकी वजह से उनका राज्य हमेशा धन-संपत्ति से भरा रहता था. ऐसा कहा जाता है कि मुगल शासन के समय देश की आय ब्रिटेन के पूरे राज्य  से भी अधिक थी. इसके अलावा भारत में वस्तु विनिमय प्रणाली भी सबसे अधिक प्रचलित थी. भारत की कई ऐसी वस्तुएं थी, जो विदेशों में आयात निर्यात की जाती थी.

आशा करते हैं कि यह ब्लॉग आपको भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था? की पूर्ण जानकारी प्रदान करने में समर्थ रहा। अन्य महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी के लिए हमारे अन्य ब्लॉग को अवश्य पढ़ें.

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