भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयागराज शहर में संगम तट पर देवी सती के हाथ की उंगली गिरी थी, यहां 3 मंदिरों को शक्तिपीठ माना गया है, और तीनों ही मंदिर प्रयाग शक्तिपीठ की शक्ति ललिता हैं, यह शक्तिपीठ ललिता के नाम से भी प्रसिद्ध है
कैसे हुआ शक्तिपीठ का निर्माण
भगवान शिव की पत्नी देवी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पिता से अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई, जब यह सब भगवान शिव को पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया, इसके बाद में भगवान शंकर माता सती के मृत शरीर को अपने कंधे पर लेकर तांडव नृत्य करने लगे तो ब्रह्मांड को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के मृत शरीर को 51 भागों में काट दिया था, जिस स्थान पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे थे वह स्थान शक्तिपीठों में निर्मित हो गए, यदि पौराणिक कथाओं की मानें तो देवी देह के अंगों से शक्तिपीठ की उत्पत्ति हुई, जिसे भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिसमें से 51 शक्तिपीठों को ज्यादा महत्व दिया जाता है.
ललिता शक्तिपीठ
यहां स्थान उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयागराज जिले में संगम तट पर स्थित है, इसकी शक्ति है ललिता और भैरव को भव माना गया है,लोगों का मानना है कि इसी स्थान पर देवी सती की अंगुलियां ‘अक्षयवट’, ‘मीरापुर’ और ‘अलोपी’ स्थानों पर गिरी थीं, अक्षयवट किले में ‘कल्याणी-ललिता देवी मंदिर’ के समीप ही ‘ललितेश्वर महादेव’ मंदिर भी स्थापित है, मत्स्यपुराण में वर्णित 108 शक्तिपीठों में इस शक्तिपीठ का नाम ललिता बताया गया है.
कैसे पहुंचे ललिता शक्तिपीठ
यदि आप रेल मार्ग से यात्रा करते हैं, तो प्रयागराज रेलवे स्टेशन वहां से निकटतम रेलवे स्टेशन है, इस स्थान पर आप अपने निजी साधन या बस से भी आसानी से पहुंच सकते हैं, यह शहर तीन नदियों के संगम तट पर बसा हुआ है

