इस शक्तिपीठ को हिंदू धर्म में प्रसिद्धि 51 शक्तिपीठों में से एक माना गया है इस शक्तिपीठ को मुक्तिदायिनी माना जाता है यह शक्तिपीठ नेपाल के गण्डकी नदी के उद्गम पर स्थापित है.
किस प्रकार हुआ इस शक्तिपीठ का निर्माण
महादेव की पत्नी देवी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई, जब शिवजी को यह सब पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया, बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे, जिस स्थान पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे थे, वह स्थान शक्तिपीठों में निर्मित हो गए, यदि पौराणिक कथाओं की मानें तो उनके अनुसार देवी देह के अंगों से इनकी उत्पत्ति हुई, जिसे भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें से 51 शक्तिपीठों का ज्यादा महत्व माना गया है.
गण्डकी- गंडकी
नेपाल राज्य में गंडकी नदी के तट पर पोखरा नामक स्थान पर स्थित मुक्तिनाथ मंदिर, इस स्थान पर देवी सती का मस्तक या गंडस्थल अर्थात कनपटी का हिस्सा गिरा था इसकी शक्ति मानी जाती है, गण्डकी चण्डी और शिव या भैरव चक्रपाणि हैं, इस शक्तिपीठ में सती के “दक्षिणगण्ड” का हिस्सा गिरा हुआ था.
यह मंदिर पोखरा से 125 किलोमीटर दूर पर स्थित है, यह मंदिर पैगोडा आकृति में बना हुआ है, विष्णुपुराण में इसका नाम मुक्तिनाथ मंदिर बताया गया है.
यहां की नदी में शालिग्राम पत्थर बहुत अधिक निकलते हैं, मान्यता है कि जो भी यहां आकर गंडकी नदी में स्नान करने के बाद माता के दर्शन कर लेता है वह व्यक्ति पूरी तरह से पाप मुक्त हो जाता है और उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

