विधानसभा और विधान परिषद को संविधान द्वारा अलग-अलग कार्य बांटे गए हैं, यदि देखा जाए तो अधिकार और शक्ति के मामले में विधानसभा, विधान परिषद से बहुत आगे है. यही हाल हमें केंद्र में देखने को मिलता है, जहां लोकसभा राज्यसभा से शक्तिशाली है. ऐसे कम ही मामले हैं, जिनमें विधान परिषद विधानसभा की बराबरी कर सकें. आज हम आपको नीचे कुछ ऐसे बिंदु देने जा रहे हैं, जिनके माध्यम से आप इन दोनों के बीच तुलना कर पता लगा पाएंगे कि इन दोनों के बीच क्या अंतर है.
विधानसभा और विधान परिषद की शक्तियां कहां-कहां समान हैं?
- साधारण विधेयकों को प्रारंभ करना.
- मुख्यमंत्री या अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करना. आपको यह भी जानना चाहिए कि मंत्री विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य हो सकते हैं.
- राज्यपाल के द्वारा जो अध्यादेश जारी होते हैं, उनको स्वीकार या अस्वीकार करना.
- प्रत्येक राज्य में कुछ संवैधानिक संस्थाएँ होती हैं, जैसे राज्य वित्त आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग आदि. इन सभी संस्थाओं के द्वारा जारी किए गए reports पर विचार करना.
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विधानसभा की शक्तियां विधान परिषद से किन मामलों में अधिक हैं
- धन विधेयक केवल विधानसभा में ही प्रारंभ किए जा सकते हैं. विधान परिषद् धन विधेयक में न तो संशोधन कर सकती है, और न उसे अस्वीकार कर सकती है. भले विधान परिषद् चाहे तो धन विधेयक को 14 दिनों तक रोक सकती है, या फिर 14 दिनों के अंदर इसमें संशोधन से सम्बंधित सिफारिश कर सकती है. विधानसभा इन सिफारिशों को स्वीकार भी कर सकती है, और खारिज भी. सभी परिस्थिति में विधानसभा की राय को ही अंतिम राय मानी जाती है.
- वित्तीय विधेयक [अनुच्छेद 207 (1)] सिर्फ विधानसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है. लेकिन एक बार वित्तीय विधेयक प्रस्तुत हो जाता है, तो दोनों सदनों की शक्तियाँ सामान हो जाती है.
- कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, यह निर्णय करने का अधिकार मात्र विधानसभा के अध्यक्ष के पास होता है.
- राज्यसभा के चुनाव में सिर्फ विधानसभा के ही सदस्य भाग लेते हैं, ना कि विधान परिषद के सदस्य.
- विधान परिषद का पूर्ण अस्तित्व विधानसभा के विवेक ऊपर निर्भर रहता है. अगर विधानसभा चाहे तो विधान परिषद को पूरी तरह नष्ट करने के लिए विशेष बहुमत से संकल्प पारित कर सकती है,
- किसी भी बजट को पारित करने के मामले में भी विधानसभा को परिषद् की मुकाबले अधिक अधिकार प्राप्त हैं. वह सभी मंत्रालयों द्वारा मांगे गए अनुदान ओ पर विचार करती है, और उन्हें पारित भी करती है. विधान परिषद उन पर बहस तो कर सकती है, किंतु पारित करने का अधिकार उसे नहीं प्राप्त है.
- विधानसभा के सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भी भाग लेते हैं, पर विधान परिषद के सदस्य इस चुनाव में भाग नहीं ले सकते हैं.
- मंत्री परिषद विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होता है, विधानसभा अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से मंत्री परिषद को हटा भी सकती है, लेकिन विधान परिषद के पास ऐसी कोई भी शक्ति नहीं होती है.
- यदि साधारण विधेयक की बात की जाए तो इस मामले में भी अधिक शक्ति विधानसभा पास ही होती है, अगर विधानसभा कोई विधेयक पारित करती है तो विधान परिषद उस विधेयक को ज्यादा से ज्यादा 4 महीने तक ही रोक सकती है, प्रथम बार में 3 महीने और फिर द्वितीय बार में 1 महीने देखा जाए तो विधान परिषद विधेयक पास न हो, इसके लिए यह प्रयासरत दिखती है.
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