माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मोनी अमावस्या कहते हैं, इसको आम भाषा में माघ अमावस्या भी कहा जाता है, माघ के महीने में हर दिन गंगा स्नान करने का महत्व है, क्योंकि माघ के महीने में गंगा जल को अमृत के समान माना जाता है, इसमें स्नान करने मात्र से ही सारे पाप धुल जाते हैं, और मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसी कारण से गंगा को मोक्षदायिनी भी कहा जाता है, गंगा के स्पर्श मात्र से ही राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ था, इस वजह से मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या के दिन गंगा स्नान का बड़ा ही महत्व है, इसी दिन प्रयागराज, हरिद्वार समेत कई स्थानों पर स्नान दान किया जाता है, तो आइए जानते हैं कि इस साल मौनी अमावस्या कब है, और स्नान दान का शुभ मुहूर्त क्या है.
मौनी अमावस्या 2023 में तिथियां
हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तिथि प्रारंभ 21 जनवरी दिन शनिवार को सुबह 06 बजकर 17 मिनट पर होगी. इस तिथि का समापन अगले दिन 22 जनवरी रविवार को 02 बजकर 22 मिनट पर हो जाएगा, 21 जनवरी को सूर्य उदय सुबह 7:14 पर है, इसी प्रकार उदय तिथि के आधार पर मोनी अमावस्या यह माघ अमावस्या 21 जनवरी शनिवार को मानी गई है
माघ महीने में स्नान की चार प्रमुख तिथियां
मौनी अमावस्या
माघ महीने की अमावस्या तिथि को मोनी अमावस्या के नाम से जानी जाती है, मान्यता है कि इस दिन गंगा यमुना और सरस्वती नदियों में देवताओं का वास होता है, इसी कारण से इस दिन को स्नान का विशेष महत्व दिया जाता है, मान्यता है कि मोनी अमावस्या के दिन स्नान करने के बाद दान करना जरूरी होता है, इस दान से 100 गुना ज्यादा पुण्य प्राप्त होता है, इस दिन सामर्थ्य के अनुसार तिल के लड्डू, तिल का तेल, अन्न, आंवला, गर्म कपड़े आदि का दान करें, इस बार मोनी अमावस्या 1 जनवरी को है.
बसंत पंचमी
बसंत पंचमी के दिन को भी पवित्र नदियों में स्नान के लिए बेहद खास दिन माना जाता है, इस दिन को मां सरस्वती की आराधना का दिन होता है, इस दिन में नदी स्नान के बाद मां शारदा की पूजा करनी चाहिए, बसंत पंचमी के दिन संगम में स्नान करना और भी अच्छा माना जाता है क्योंकि यहां गंगा और यमुना के साथ ही सलीला सरस्वती भी मौजूद है, इस बार बसंत पंचमी 5 फरवरी को है.
अचला सप्तमी
माघ मास के शुक्ल पक्ष की समाप्ति तिथि को आचार समाप्ति के नाम से भी जानते हैं, इस दिन नदियों में स्नान और सूर्य को आराध्य देव और दान पूर्ण करने से व्यक्ति को आयु रोग से छुटकारा और सुख समृद्धि में प्राप्ति होती है, इसे सूर्यरथ सप्तमी, पुत्र सप्तमी, रथ आरोग्य सप्तमी के नाम से भी जानते हैं, इस बार अंचल सप्तमी 8 फरवरी को है.
माघी पूर्णिमा
माघी पूर्णिमा को लेकर शास्त्रों में कहा गया है, कि इस दिन स्वयं भगवान विष्णु गंगा नदी में निवास करते हैं, इसी कारण से इस दिन को गंगा स्नान में विशेष महत्व दिया गया है, इस दिन गंगा घाट पर उत्सव जैसा माहौल होता है, मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद दान करने से 32 गुना फल प्राप्त होता है, इसी कारण से इसे 32 पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, इस बार माघी पूर्णिमा 16 फरवरी को मनाई जाएगी.

