गेंदे का फूल सुंदर और सुगंधित होता है, यह फूल भारत के लगभग सभी राज्यों में उगाया जा सकता है, और इसे भारत के अलग-अलग राज्य में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे गेंदा, गुल्तोरा, लालमुरुगा, हजारा और मखमली आदि, गेंदे के पेड़ की लंबाई 1 फीट से लेकर 5 फीट तक होती है, इस फूल का वैज्ञानिक नाम Tagertes है, इसे आप बड़े ही आसानी के साथ कहीं भी उगा सकते हैं.
गेंदे के फूल की जानकारी (Marigold Flower Information in Hindi)
गेंदे के फूल की कई प्रजातियां होती है. जिसमें अलग-अलग प्रजाति के फूल अलग-अलग रंग के होते हैं, जिनके नाम नीचे निम्नलिखित रुप में दिए गए हैं:-
नारंगी गेंदा (Orange Marigold)
मैरून गेंदा (Maroon Marigold)
पीला गेंदा (Yellow Marigold)
सोना गेंदा (Golden Marigold)
क्रिमसन गेंदा (Crimson Marigold)
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सफेद गेंदा (White Marigold)

गेंदे के फूल का उपयोग (Gende ke phool ka upyog)
गेंदे के फूल का कई रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिनमें से कुछ उपयोग के बारे में नीचे निम्नलिखित रुप में बताया गया है:-
- त्वचा की सूजन को कम करने वाली दवाओं में गेंदे के फूल का उपयोग किया जाता है.
- इत्र बनाने के लिए भी गेंदे के फूल का उपयोग किया जाता है.
- माला और गजरा बनाने के लिए गेंदे के फूल उपयोग किया जाता है.
- गेंदे के पत्ते का उपयोग घाव तथा सूजन से राहत पाने के लिए किया जाता है.
- गेंदे के फूल से तेल भी बनाया जाता है, जिसका उपयोग सौंदर्य उत्पादों में होता है.
- गेंदे के फूल का चूर्ण बनाकर इसका उपयोग काढा और शरबत के रूप में किया जाता है.
- गेंदे के फूल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है.
गेंदा फूल के फायदे (Genda phool ke fayde)
1. कानों में दर्द होने पर – अगर आपके कान में दर्द है, तो आप गेंदे के पत्ते की सहायता से राहत पा सकते हैं, इसके लिए आपको गेंदे के पत्ते का रस अपने कान में डालना होगा, इससे आपको अवश्य ही राहत मिलेगी.
2. नकसीर होने पर – अगर आपको नकसीर जैसी समस्या है, तो आप गेंदे के पत्ते का रस निकालकर 1 से 2 बूंद अपने नाकों में डाल ले, इससे आपकी नकसीर की समस्या से राहत मिलेगी.
3. आंखों के रोग के लिए – अगर आपकी आंखों में किसी भी प्रकार का इंफेक्शन है, तो आप गेंदे के फूल को पीस के उसका लेप बनाकर, आंखों में चारों तरफ लगाएं, इससे आपके आंखों के इन्फेक्शन से जल्द ही राहत मिलेगी.
4. पेशाब संबंधित रोगों में – अगर आपको पेशाब संबंधित कोई रोग है, जैसे पेशाब खुलकर ना आना, रुक रुक कर आना, पेशाब के रास्ते में दर्द होना आदि, तो आप गेंदे के पत्तों का रस निकालकर उसमें मिश्री मिलाएं, और इसका तीन टाइम सेवन करें, इससे आपकी पेशाब संबंधित सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी.
गेंदे के फूल को कैसे उगाए (Genda ke phool ko kaise ugaye)
- गेंदे के फूल को उसी जगह उगाया जा सकता है, जहां की मिट्टी बलुई और नम हो, गेंदे के फूल को उगाने के लिए सबसे पहले आपको गेंदे के फूल के बीज को ले लेना होगा.
- जमीन में एक छोटा सा गड्ढा करके, उसमें उस बीज को डालकर मिट्टी से ढकना होगा.
- अब आप देखेंगे, कुछ ही दिनों में गेंदे के फूल मिट्टी से बाहर निकल आएंगे. और जब यह थोड़े बड़े हो जाएं, तो इसे उस जगह से निकालकर किसी दूसरी जगह भी लगा सकते हैं.
- गेंदे के फूल में प्रतिदिन आपको शाम और सुबह पानी डालना होगा. और साथ ही गोबर खाद को भी डालना होगा. इससे आपका गेंदे का फूल 45 दिन के अंदर पूर्ण रूप से विकसित हो जाएगा, और उस में फूल आने शुरू हो जाएंगे.
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गेंदा फूल की खेती कब होती है? (Genda phool ki kheti kab hoti hai)
गेंदे का फूल बारहमासी होता है, इसे तीनों मौसमों में बोया जा सकता है. जो लोग गेंदे की खेती करते हैं, वह गेंदे के फूल का रोपण मुख्यत: जून जुलाई के महीने में करते हैं. और इसके पेड़ अक्टूबर के महीने तक तैयार हो जाती है. और उन में फूल आने शुरू हो जाते हैं.
गेंदे के फूल के पौधे की देखभाल कैसे करें?
सूर्य की रोशनी–
गेंदे के फूल को पूर्ण रूप से विकसित होने के लिए सूर्य के प्रकाश की अत्यधिक आवश्यकता होती है इसलिए गेंदे के फूल को जितना हो सके उतना धूप में रखें.
पानी देने की तकनीक –
गर्मियों में प्रत्येक दिन गेंदे के फूल के पौधे में पानी डालें, और साथ ही प्लांट को पानी देते समय यह सुनिश्चित कर ले की पानी प्लांट के ऊपर बौछार के रूप में डालना चाहिए ना की तेज धार के रूप में.
खाद डालना–
बीज बोने से पहले 2 : 1 अनुपात के साथ मिट्टी में अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद मिला ले जैविक खाद अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद, खेत की खाद, या वर्मीकम्पोस्ट हो सकती है.
उत्तम सजावट–
जब गेंदे के फूल के पौधे 45 दिन से अधिक पुराने हो जाये , तो प्रति पौधे 15:15:15 (एनपीके) उर्वरक का 1 बड़ा चम्मच प्रदान करें या प्रत्येक पौधे के आसपास मिट्टी में मुट्ठी भर वर्मीकम्पोस्ट खाद मिलाएं.
पत्तों की देखभाल–
हमेशा किसी भी कीट / फंगल / किसी अन्य संक्रमण के शुरुआती लक्षणों की खोज करें. और साथ ही ऐसी बीमारियों के किसी भी लक्षण के दिखते ही पौधे पर उचित दवाओं का छिड़काव करें.
यह सब करने के बाद आपका गेंदे का फूल बुआई के लगभग 35-50 दिनों के बाद खेलने लगेगा.