नोएडा स्थित सुपरटेक के 32 और 29 मंजिला
ट्विंन टॉवर्स को महज 7 सेकेंड में बम के जरिए जमीदोज कर दिया गया. एक बटन दबाने से 300 करोड़ रूपए मिट्टी में मिल गए. बता दें मुंबई की कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग और दक्षिण अफ्रीकी सहयोगी जेट डिमोलिशन को गगनचुंबी दोनों इमारतों को ध्वस्त करने का काम सौपा गया था.
महज 7 सेकंड में 300 करोड़ के टॉवर्स हो गए ध्वस्त
एपेक्स और सियान नामक इन दोनों इमारतों को कोर्ट ने गिरा देने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए 28 अगस्त को इन विशाल टॉवर्स को जमींदोज कर दिया गया. जिस इमारत को बनाने में सालों का वक्त लगा वह इमारत देखते ही देखते महज चंद सेकेंड में मिट्टी के मलवे में तब्ददील हो गई. आप को बता दें दोनों इमारतों में 3700 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ लगाकर उड़ाया गया. विस्फोट होते ही पूरे इलाके में धूल का कोहरा मानों छा गया हो. क़ुतुब मीनार से भी ऊंची इन इमारतों को जमीदोज़ होते देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे. चलिए आप को अब ये बताते हैं की आखिर इस विशालकाय टॉवर्स को मिट्टी में क्यों मिला दिया गया.
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अवैध रूप से किया गया था ट्विंन टॉवर का निमार्ण
दरअसल नोएडा सेक्टर 93ए में बने ट्विंन टॉवर्स का निमार्ण अवैध रूप से किया गया था, जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इस गिराने के आदेश दिए थें. चलिए इसकी पूरी कहानी जानने के लिए थोड़ा पीछे जाते हैं. दरअसल साल 2004 में सुपर टेक को नोएडा के सेक्टर 93ए में हाउसिंग सोसाइटी बनाने के लिए जमीन का एक हिस्सा आवंटित किया गया. बिल्डर्स को 37 मीटर ऊंचाई की 10 मंजिला 14 इमारतें बनाने की अनुमति दी गई थी. जिसके बाद साल 2006 में इन नियमों में कुछ बदलाव करते हुए बिल्डर्स को थोड़े और जमीन देते हुए बिल्डर्स को दो और अधिक फ्लोर और दो अधिक टॉवर्स बनाने के साथ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अनुमति दी जाती है. यानि की 16 टॉवर्स और एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की इज़ाजत दी गई थी. 2014 तक 14 टॉवर्स बन के खड़े हो हुए.लेकिन 2009 में सुपर टेक ने ट्विंन टॉवर्स का निर्माण काम शुरू कर दिया जिसके बाद से वहां के आसपास के सोसाइटी में रहने वाले लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया. इस विरोध की वजह ये थी उनकी सोसाइटी के सामने जिस एरिया को पहले ग्रीन एरिया बताया गया था अब वहीं दो विशालकाय टॉवर बनाए जा रहे थे.
कई नियमों को रखा गया था ताक पर
गौरतलब है कि इन दोनों टॉवर्स को सुरक्षा के कई नियमों को ताक पर रख कर बनाया गया था. इस टॉवर्स का निर्माण करते समय अग्नि सुरक्षा नियमों और दो इमारतों के बीच की दूरी के नियमों को भी नजर अंदाज किया गया था. नेशनल बिल्डिंग कोर्ट (NBC) 2005 के नियमों का भी उल्लंघन किया गया था. NBC 2005 के अनुसार ऊंची इमारतों के आसपास खुली जगह के नियम हैं जिसका बिल्कुल ख्याल नहीं रखा गया. सुपर टेक ट्विंन टॉवर T 16 और T 17 में निर्माण में यूपी अर्पाटमेंट एक्ट का भी उल्लंघन किया गया था. जिन लोगों ने ग्रीन एरिया देख कर घर खरीदा था उनके सामने ट्विन टॉवर्स खड़े कर देने किसी ठगी से कम नहीं था.
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कोर्ट ने दिया इंसाफ
अपने साथ हुए इस ठगी को देखते हुए आसपास की सोसाइटी में रहने वाले लोगों ने सुपर टेक के खिलाफ 2010 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 11 साल लंबी लड़ाई का नतीजा आज हम सब के सामने है. कोर्ट के आदेश के अनुसार आज ट्विन टॉवर को जमींदोज कर दिया गया.