उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला और राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली राज्य है। भारतीय राजनीति में एक प्रसिद्ध कहावत है— “दिल्ली का रास्ता लखनऊ होकर गुजरता है।” देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री पद भारतीय लोकतंत्र के सबसे शक्तिशाली पदों में से एक माना जाता है।
26 जनवरी 1950 को यूनाइटेड प्रोविंस का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से ‘उत्तर प्रदेश’ रखा गया था। तब से लेकर आज तक राज्य ने 21 से अधिक व्यक्तिगत मुख्यमंत्रियों का नेतृत्व देखा है। स्वतंत्रता सेनानी पंडित गोविंद बल्लभ पंत से लेकर भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी, किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह, और लगातार दो कार्यकाल पूरा करने वाले योगी आदित्यनाथ तक—हर मुख्यमंत्री ने राज्य के इतिहास, विकास और सामाजिक ताने-बाने पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
इस विस्तृत लेख में हम 1950 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश के सभी मुख्यमंत्रियों की क्रमवार सूची (Chronological List), उनका कार्यकाल, राजनीतिक दल और उनके शासनकाल की प्रमुख ऐतिहासिक उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्रियों की मुख्य झलकियां (Key Highlights & GK Facts)
- उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री: पंडित गोविंद बल्लभ पंत (26 जनवरी 1950)
- भारत व यूपी की पहली महिला मुख्यमंत्री: सुचेता कृपलानी (1963 – 1967)
- सर्वाधिक बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड: सुश्री मायावती (कुल 4 बार—1995, 1997, 2002, 2007)
- सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री: अखिलेश यादव (38 वर्ष की आयु में 2012 में शपथ ली)
- यूपी के मुख्यमंत्री जो बाद में देश के प्रधानमंत्री बने: चौधरी चरण सिंह (5वें पीएम) और विश्वनाथ प्रताप सिंह (7वें पीएम)
- लगातार दो पूर्ण कार्यकाल (10+ वर्ष) करने वाले भाजपा के पहले सीएम: योगी आदित्यनाथ (2017 से लगातार)
- राज्य में अब तक राष्ट्रपति शासन (President’s Rule): कुल 10 बार लगाया गया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की संपूर्ण सूची (1950 से अब तक)
| क्र.सं. | मुख्यमंत्री (फोटो सहित) | पदभार ग्रहण | पदमुक्ति | कुल कार्यकाल | राजनीतिक दल |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 26 जनवरी 1950 | 27 दिसंबर 1954 | 4 वर्ष, 335 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| 2 | 28 दिसंबर 1954 | 6 दिसंबर 1960 | 5 वर्ष, 344 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| 3 | 7 दिसंबर 1960 | 1 अक्टूबर 1963 | 2 वर्ष, 298 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| 4 | 2 अक्टूबर 1963 | 13 मार्च 1967 | 3 वर्ष, 162 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| (3) | 14 मार्च 1967 | 2 अप्रैल 1967 | 19 दिन (दूसरी बार) | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| 5 | 3 अप्रैल 1967 | 25 फरवरी 1968 | 328 दिन | भारतीय क्रांति दल (संविद) | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 25 फरवरी 1968 | 26 फरवरी 1969 | 1 वर्ष, 1 दिन | – |
| (3) | 26 फरवरी 1969 | 17 फरवरी 1970 | 356 दिन (तीसरी बार) | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| (5) | 17 फरवरी 1970 | 1 अक्टूबर 1970 | 226 दिन (दूसरी बार) | भारतीय क्रांति दल | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 1 अक्टूबर 1970 | 18 अक्टूबर 1970 | 17 दिन | – |
| 6 | 👤त्रिभुवन नारायण सिंह | 18 अक्टूबर 1970 | 3 अप्रैल 1971 | 167 दिन | कांग्रेस (संगठन) |
| 7 | 4 अप्रैल 1971 | 12 जून 1973 | 2 वर्ष, 69 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 12 जून 1973 | 8 नवंबर 1973 | 149 दिन | – |
| 8 | 8 नवंबर 1973 | 29 नवंबर 1975 | 2 वर्ष, 21 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 30 नवंबर 1975 | 21 जनवरी 1976 | 52 दिन | – |
| 9 | 21 जनवरी 1976 | 30 अप्रैल 1977 | 1 वर्ष, 99 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 30 अप्रैल 1977 | 23 जून 1977 | 54 दिन | – |
| 10 | 23 जून 1977 | 27 फरवरी 1979 | 1 वर्ष, 249 दिन | जनता पार्टी | |
| 11 | 28 फरवरी 1979 | 17 फरवरी 1980 | 354 दिन | जनता पार्टी | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 17 फरवरी 1980 | 9 जून 1980 | 113 दिन | – |
| 12 | 9 जून 1980 | 18 जुलाई 1982 | 2 वर्ष, 39 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| 13 | 👤श्रीपति मिश्र | 19 जुलाई 1982 | 2 अगस्त 1984 | 2 वर्ष, 14 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
| (9) | 3 अगस्त 1984 | 24 सितंबर 1985 | 1 वर्ष, 52 दिन (दूसरी बार) | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| 14 | 👤वीर बहादुर सिंह | 24 सितंबर 1985 | 24 जून 1988 | 2 वर्ष, 274 दिन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
| (9) | 25 जून 1988 | 4 दिसंबर 1989 | 1 वर्ष, 162 दिन (तीसरी बार) | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | |
| 15 | 5 दिसंबर 1989 | 24 जून 1991 | 1 वर्ष, 201 दिन | जनता दल | |
| 16 | 24 जून 1991 | 6 दिसंबर 1992 | 1 वर्ष, 165 दिन | भारतीय जनता पार्टी | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 6 दिसंबर 1992 | 4 दिसंबर 1993 | 363 दिन | बाबरी विध्वंस उपरांत |
| (15) | 4 दिसंबर 1993 | 3 जून 1995 | 1 वर्ष, 181 दिन (दूसरी बार) | सपा-बसपा गठबंधन | |
| 17 | 3 जून 1995 | 18 अक्टूबर 1995 | 137 दिन (प्रथम बार) | बहुजन समाज पार्टी | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 18 अक्टूबर 1995 | 21 मार्च 1997 | 1 वर्ष, 154 दिन | – |
| (17) | 21 मार्च 1997 | 21 सितंबर 1997 | 184 दिन (दूसरी बार) | बहुजन समाज पार्टी | |
| (16) | 21 सितंबर 1997 | 12 नवंबर 1999 | 2 वर्ष, 52 दिन (दूसरी बार) | भारतीय जनता पार्टी | |
| 18 | 12 नवंबर 1999 | 28 अक्टूबर 2000 | 351 दिन | भारतीय जनता पार्टी | |
| 19 | 28 अक्टूबर 2000 | 7 मार्च 2002 | 1 वर्ष, 130 दिन | भारतीय जनता पार्टी | |
| – | 🏛️राष्ट्रपति शासन | 8 मार्च 2002 | 3 मई 2002 | 56 दिन | – |
| (17) | 3 मई 2002 | 29 अगस्त 2003 | 1 वर्ष, 118 दिन (तीसरी बार) | बहुजन समाज पार्टी | |
| (15) | 29 अगस्त 2003 | 13 मई 2007 | 3 वर्ष, 257 दिन (तीसरी बार) | समाजवादी पार्टी | |
| (17) | 13 मई 2007 | 15 मार्च 2012 | 4 वर्ष, 307 दिन (चौथी बार – पूर्ण बहुमत) | बहुजन समाज पार्टी | |
| 20 | 15 मार्च 2012 | 19 मार्च 2017 | 5 वर्ष, 4 दिन (पूर्ण कार्यकाल) | समाजवादी पार्टी | |
| 21 | 19 मार्च 2017 | वर्तमान तक | 9+ वर्ष (लगातार 2 कार्यकाल) | भारतीय जनता पार्टी |
प्रमुख मुख्यमंत्रियों का योगदान और ऐतिहासिक उपलब्धियां (Major Achievements)
1. पंडित गोविंद बल्लभ पंत (1950 – 1954)
उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित। उन्होंने राज्य में सामंतवादी ‘जमींदारी प्रथा’ का उन्मूलन (Abolition of Zamindari) किया और लाखों भूमिहीन किसानों को उनकी जोत की जमीन का मालिकाना हक दिलाया। हिंदी को उत्तर प्रदेश की आधिकारिक राजभाषा बनाने का ऐतिहासिक निर्णय भी इन्हीं के कार्यकाल में हुआ।
2. सुचेता कृपलानी (1963 – 1967)
स्वतंत्र भारत के किसी भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री। अपने कठोर प्रशासनिक अनुशासन के लिए जानी जाती थीं। 1960 के दशक में राज्य कर्मचारियों की 62 दिनों तक चली ऐतिहासिक हड़ताल के दौरान उन्होंने बिना झुके दृढ़ता और कूटनीति से संकट का समाधान निकाला।
3. चौधरी चरण सिंह (1967-1968, 1970)
उत्तर प्रदेश के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री और किसानों के मसीहा। उन्होंने ‘भूमि जोत अधिनियम 1960’ (Land Holding Act) लागू किया और किसानों के लिए पटवारी व्यवस्था में आमूलचूल सुधार किए। बाद में वे देश के 5वें प्रधानमंत्री भी बने।
4. विश्वनाथ प्रताप सिंह (1980 – 1982)
बाद में भारत के 7वें प्रधानमंत्री बने। बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र में कुख्यात डकैतों के आतंक को समाप्त करने के लिए व्यापक पुलिस अभियान चलाया। डकैतों द्वारा निर्दोष ग्रामीणों की हत्या की एक घटना से व्यथित होकर उन्होंने नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
5. मुलायम सिंह यादव (1989-1991, 1993-1995, 2003-2007)
समाजवादी पार्टी के संस्थापक और 3 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को मुख्यधारा की राजनीति में सशक्त किया। प्रशासनिक स्तर पर प्राथमिक शिक्षा, कन्या विद्या धन योजना, और ग्रामीण विकास योजनाओं की शुरुआत की। वे केंद्र सरकार में देश के रक्षा मंत्री भी रहे।
6. कल्याण सिंह (1991-1992, 1997-1999)
उत्तर प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री। नकल विहीन परीक्षा के लिए ऐतिहासिक ‘नकल विरोधी कानून’ लागू किया। अपराध नियंत्रण और सख्त कानून व्यवस्था के लिए उनका प्रशासन आज भी याद किया जाता है। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचा विध्वंस के तुरंत बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
7. सुश्री मायावती (1995, 1997, 2002, 2007 – 2012)
देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री और 4 बार यूपी की कमान संभालने वाली एकमात्र नेता। 2007 में 16 साल बाद राज्य में पूर्ण बहुमत की स्थिर सरकार बनाई। सख्त कानून व्यवस्था (Cracking down on Mafia), ताज एक्सप्रेसवे (यमुना एक्सप्रेसवे) का निर्माण, डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क, मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना और दलित सशक्तिकरण उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां हैं।
8. अखिलेश यादव (2012 – 2017)
उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री (38 वर्ष की आयु)। देश का सबसे लंबा 6-लेन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे रिकॉर्ड 23 महीने में बनवाया। लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना, यूपी 100 (डायल 112) इमरजेंसी पुलिस रिस्पांस सिस्टम, 108/102 एम्बुलेंस सेवा, और छात्रों को मुफ्त लैपटॉप वितरण जैसी तकनीकी पहल की शुरुआत की।
9. योगी आदित्यनाथ (2017 – वर्तमान)
37 साल बाद यूपी में लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी करने वाले मुख्यमंत्री।
• माफिया और अपराध पर जीरो टॉलरेंस: बुलडोजर एक्शन, गैंगस्टर एक्ट और सख्त कानून-व्यवस्था से प्रदेश की छवि बदली।
• एक्सप्रेसवे प्रदेश: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का निर्माण और गंगा एक्सप्रेसवे पर तेज काम।
• अयोध्या भव्य राम मंदिर निर्माण और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: वैश्विक पटल पर धार्मिक पर्यटन का पुनरुद्धार।
• ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट: उत्तर प्रदेश को ₹40 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव दिलाकर 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य।
• जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (नोएडा): एशिया का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण।
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule in UP)
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत कुल 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। सबसे पहला राष्ट्रपति शासन 1968 में और अंतिम बार 2002 में लगाया गया था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs – UP Chief Ministers)
Q1. उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री कौन थे?
उत्तर: पंडित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी।
Q2. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री कौन बना है?
उत्तर: सुश्री मायावती ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप में सर्वाधिक 4 बार (1995, 1997, 2002 और 2007) शपथ ली है।
Q3. भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री कौन थीं और वे किस राज्य की थीं?
उत्तर: सुचेता कृपलानी भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं और उन्होंने 1963 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला था।
Q4. उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री कौन बने थे?
उत्तर: अखिलेश यादव मात्र 38 वर्ष की आयु में 15 मार्च 2012 को उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे।
Q5. उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री कौन हैं?
उत्तर: वर्तमान में योगी आदित्यनाथ (भारतीय जनता पार्टी) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, जो 19 मार्च 2017 से लगातार इस पद पर कार्यरत हैं।
निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों का इतिहास वास्तव में भारतीय लोकतंत्र की विकास यात्रा का दर्पण है। जमींदारी उन्मूलन से लेकर आधुनिक एक्सप्रेसवे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के युग तक, प्रत्येक मुख्यमंत्री के फैसलों ने राज्य की तकदीर गढ़ी है। यह लेख UPPSC, UPSC, UPSSSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों और सामान्य ज्ञान के पाठकों के लिए एक संपूर्ण संदर्भ गाइड है।

