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भारत रत्न डॉ. अब्दुल कलाम: एक योगदायी जीवन

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जिन्हें भारत का मिसाइलमैन कहा जाता था, आज से तीन साल हो गए हैं। 2015 में, आज (27 जुलाई) भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) शिलौंग में ‘रहने योग्य ग्रह’ पर एक व्याख्यान देते समय उसे दिल का दौरा पड़ गया था। वह वैज्ञानिक, इंजीनियर और शिक्षक थे। 1998 में भारत ने पहली बार 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया, जिसमें उन्होंने निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई थी। 

1950 में, कलाम ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। स्नातक करने के बाद उन्होंने भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम किया। उसके बाद, उन्होंने एक के बाद एक मुकाम हासिल किया और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

वे 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में आए, जहां उन्होंने कई उपग्रहों का प्रक्षेपण किया। उन्हीं ने भारत का स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-3) बनाया था। वे भी अग्नि और पृथ्वी मिसाइलों के निर्माता थे। 

इसके बाद भारत ने रूस के साथ मिलकर 1998 में ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड नामक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाना शुरू किया। ब्रह्मोस मिसाइल समुद्र, आकाश और धरती से कहीं से भी हमला कर सकती है। भारत को मिसाइल क्षेत्र में मिली इस बड़ी सफलता के बाद ही अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन कहा जाता था। 

भारत रत्न से हो चुके हैं सम्मानित

1997 में उन्हें देश के प्रति उनके समर्पण और तकनीक के विकास में उनके अद्भुत योगदान के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इससे पहले, उन्होंने 1981 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण प्राप्त किए थे। भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले, अब्दुल कलाम को भारत रत्न मिला था। जाकिर हुसैन और सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इस सम्मान को पहले ही प्राप्त किया था। 

डॉ. अब्दुल कलाम के बारे में बात करने के लिए बहुत कम शब्द हैं; वह भारतीय इतिहास का एक प्रतीक, एक महान वैज्ञानिक, एक राष्ट्रभक्त और सबसे प्रेरणादायक व्यक्ति था। हम उनके जीवन और योगदान का वर्णन करने का प्रयास करेंगे।

2002 से 2007 तक डॉ. अब्दुल पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ थे। 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम गांव में उनका जन्म हुआ था। उनके पिता जनबी मस्तान एक नागरिक अधिकारी थे, और उनकी मां अशिया बी कैलीम एक धार्मिक महिला थीं। अब्दुल कलाम का परिवार धार्मिक था, जो उनके संवेदनशील और बुद्धिमान बनने में मदद करती थी।

कलाम बचपन से ही विज्ञान, अंतरिक्ष और युद्ध विमानन में नवीनतम रुचि रखते थे। उन्होंने रामेश्वरम (Ramanathapuram) में पढ़ाई की और इंजीनियरिंग में तमिलनाडु (Tiruchirappalli) के St. Joseph’s कॉलेज में पढ़ाई की। वे बाद में मद्रास विश्वविद्यालय से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री हासिल करने के लिए चेन्नई जाएं. फिर, भारतीय संसद के समर्थन से वे विभाजन प्रौधशाला में विज्ञानी बनने के लिए शामिल हुए।

इस समय से ही उनका करियर शुरू हुआ, जब उन्होंने पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फिर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) में काम किया। भारत ने उनके नेतृत्व में अपने पहले इंटरबॉलिस्टिक बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) अग्नि, पृथ्वी, नाग और अकाश बनाए।

2002 से 2007 तक भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति बनने के बाद अब्दुल कलाम बहुत प्रसिद्ध हुए। उन्हें भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति होने पर गर्व हुआ। जब वे राष्ट्रपति रहे, वे लोगों के बीच गए और अपनी अद्भुत व्यक्तिगतता और बातचीत के माध्यम से बहुत कुछ बदल गए।

उनके जीवन भर में, उन्होंने शिक्षा, विज्ञान, संशोधन और युवा पीढ़ी के प्रेरणात्मक विकास पर कई पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रेरणादायी बातें और अनमोल विचारों ने लोगों के दिलों को छू लिया और वे हमेशा याद रहेंगे।

आज, अब्दुल कलाम को याद करते हुए हमें एक संघर्षशील, सक्षम, दृढ़ नेतृत्व की याद आती है। उन्हें सर्वोच्चता के प्रति आदर्श, सार्वभौमिक विचारधारा और व्यापक सोच बनाता है।

अब्दुल कलाम के निधन से पूरा भारत दुखी था, लेकिन उनके विचार, योगदान और देशभक्ति की आँधी भारतीय दिलों में हमेशा रहेगी। उनका जीवन हमें सच्ची मानवता के लिए प्रेरणा देगा और हमें उनके संदेशों को हर समय स्मरण करने की जिम्मेदारी देगा।

जैसा कि हम जानते हैं, अब्दुल कलाम ने भारतीय मिसाइल प्रोग्राम को एक नई ऊंचाई तक ले जाने में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया, इसलिए उसे “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” कहा जाता था। उन्होंने भारत को विश्वस्तरीय बनाने के लिए बहुत कुछ किया।

डॉ. विक्रम साराभाई, अब्दुल कलाम के पहले मार्गदर्शक और उनके गुरु, उनके जीवन और करियर में एक महत्वपूर्ण घटना थी। डॉ. साराभाई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पहले प्रमुख थे और अब्दुल कलाम उनके प्रेरणादायी शब्दों से प्रेरित हुए।

कलाम के राष्ट्रपति पद पर रहते हुए, उन्होंने विज्ञान, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में युवाओं पर खास ध्यान दिया। उन्होंने पुरस्कार देने वाले मानव या पीडीएम (पुरस्कार देने वाला मानव) कार्यक्रम शुरू किया, जिसका लक्ष्य युवा पीढ़ी को साहस और नवाचार के क्षेत्र में प्रेरित करना था।

अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद सभी उम्र के लोगों को विज्ञान और आध्यात्मिकता के साथ जुड़ने के लिए अपने जीवन के अगले पड़ाव में काम करने के लिए समर्पित किया। उनकी प्रेरक भाषणों ने लाखों युवा लोगों को विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रेरित किया।

अब्दुल कलाम की मृत्यु एक राष्ट्रीय संगठन के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत संगठन द्वारा हुई। जब वे मर गए, वे राष्ट्रीय संगठन को एक शिक्षित राष्ट्रपति खो बैठे, जो विज्ञान, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के प्रति अद्भुत समर्पण रखते थे।

यह संक्षिप्त विवरण अब्दुल कलाम के जीवन और कार्यकाल के बारे में है, जो उनके देशवासियों को उनके विचारों, विचारों और योगदान के प्रति अधिक जागरूक बनाता है। उनकी प्रेरणादायी कहानी हमें सिखाती है कि मुश्किलों और संघर्षों को हमारे मार्ग में कोई बाधा नहीं बनाना चाहिए, और अगर हम सही दृष्टिकोण अपनाते हैं, तो हम सफल हो सकते हैं।

डॉ. अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति, विज्ञानी और शिक्षक के रूप में अपने अद्भुत योगदान से भारत को विश्व स्तर पर उच्च स्थान पर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जब हम उनके लक्ष्यों और सपनों को याद करते हैं, तो हमें उनके प्रेरणादायी कार्यकाल को स्मरण करना चाहिए और उनके संदेशों को अपने जीवन में लागू करने का संकल्प लेना चाहिए।

जय हिंद।

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