स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति को 24 घंटे में लगभग 6 से 8 बार लैट्रिन जाना चाहिए. साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह मानना रहता है कि एक वयस्क व्यक्ति को प्रत्येक दो से ढाई घंटे में लैट्रिंग के लिए जाता है यथार्थ वह 24 घंटे में 6-9 बार लैट्रिंग जाता है. इसलिए आपको 24 घंटे में लगभग 6 से 8 बार लैट्रिन जाना चाहिए.
बार बार लैट्रिन क्यों आता है?
बार बार लैट्रिन आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि शरीर में विशेष खाद्य पदार्थों के सेवन से लक्षणों का बढ़ जाना – अत्यधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन कर लेना, अधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन कर लेना, गोभी, डेयरी उत्पाद, दूध, तले भुने मसालेदार पदार्थों एवं गेहूं का सेवन कर लेना आदि के कारण लैट्रिंग बार बार आती है. इसके अतिरिक्त तनाव –आईबीएस के होने में तनाव के कारण भी लैट्रिन बार बार आती है.
लैट्रिन पीला क्यों होता है?
लैट्रिंग का ऐसा रंग बीटा-कैरोटीन के कारण होता है, यह यौगिक कई सब्जियों, फलों और अनाजों में मिलता है. गाजर, शकरकंद और कद्दू में बीटा-कैरोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है. जिसके कारण पित्त की नलिकाओं में रुकावट होने के कारण भी मल का रंग पीला हो जाता है.